अब म्यूचुअल फंड से होने वाली 5,000 रुपये से ज्यादा आय पर आपको 10 फीसदी स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) चुकाना होगा। आम बजट, 2020-21 में यह प्रस्ताव किया गया है। इसे छोटे निवेशकों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। अभी तक म्यूचुअल फंड से होने वाली 1 लाख रुपये से ज्यादा डिविडेंड (लाभांश) आय पर ही 10 फीसदी टीडीएस लगता था।
वित्त विधेयक 2020 के क्लॉज 80 में शामिल किए गए एक प्रस्ताव के मुताबिक, मंत्रालय ने मौजूदा आयकर अधिनियम की धारा 194जे के नीचे एक नई धारा 194के शामिल की है, जिसमें म्यूचुअल फंड से हुई आय पर 10 फीसदी कर का प्रस्ताव किया गया है।
एक निवेश सलाहकार के मुताबिक, नई व्यवस्था में म्यूचुअल फंड में एक साल से ज्यादा अवधि के लिए 1 लाख रुपये के निवेश पर 10 हजार रुपये का रिटर्न मिलता है तो 5 हजार का रिटर्न करमुक्त होगा, जबकि बाकी 5,000 रुपये पर फंड कंपनी 10 फीसदी टीडीएस काटकर आपको भुगतान करेगी। यानी आपको 4,500 रुपये मिलेगे। हालांकि टीडीएस को आप बाद में आईटीआर में क्लेम कर सकते हैं।
भुगतान के समय काटा जाएगा टीडीएस
- वित्त विधेयक के मुताबिक, धारा 10 के क्लॉज (23 डी) के अंतर्गत बताई गईं म्यूचुअल फंड यूनिट्स या किसी खास उपक्रम के प्रशासक या किसी कंपनी से मिली यूनिट्स से संबंधित आय पर निवेशकों को कर चुकाना होगा
- किसी भी माध्यम से किसी व्यक्ति के खाते में रकम के आने के समय या भुगतान के समय (जो भी पहले हो) 10 फीसदी की दर से टीडीएस काटा जाएगा।
पहले एनआरआई पर लगता था यह कर
इस क्लॉज को शामिल किए जाने से पहले एनआरआई निवेशकों और गैर भारतीय नागरिकों के म्यूचुअल फंड में किए गए निवेश पर टीडीएस काटा जाता था। अब यह कर भारतीय नागरिकों पर भी लगेगा। पहले म्यूचुअल फंड से होने वाली एक लाख रुपये से ज्यादा लाभांश आय पर 10 फीसदी टीडीएस लगता था। नया प्रस्ताव म्यूचुअल फंड से होने वाले पूंजीगत लाभ पर लागू होगा। इसकी वजह यह है कि मौजूदा आयकर अधिनियम की धारा 2 के अंतर्गत ‘आय’ की परिभाषा में ‘मुनाफा और प्राप्तियों’ को भी शामिल किया गया है।