वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को स्पष्ट किया है किसी भी एनआरआई को विदेश में अर्जित आमदनी पर भारत में टैक्स नहीं देना होगा। एक फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश किया। मोदी सरकार का यह स्पष्टीकरण वित्त विधेयक 2020 के प्रस्ताव के बाद आया है।
वित्त विधेयक 2020 में प्रस्ताव रखा गया है कि किसी भारतीय नागरिक को भारत में निवासी तब माना जाएगा, अगर वह किसी अन्य देश या अधिकार क्षेत्र में कर लगाए जाने के लिए उत्तरदायी नहीं है। यह एक दुरुपयोग-रोधी प्रावधान है। ऐसा इसलिए क्योंकि कुछ भारतीय नागरिक भारत में कर भुगतान से बचने के लिए कम या कर रहित इलाके की नागरिकता ले लेते हैं।
एनआरआई को लेकर वित्त विधेयक 2020 में कहा गया है कि भारतीय नागरिकों की दुनिया भर में हुई कमाई पर भारत में टैक्स लगाया जाएगा। यानी ऐसे भारतीय जो दुनिया में किसी और कानून के तहत या किसी देश में टैक्स नहीं चुका रहे हैं, उन पर देश के अन्य नागरिकों की तरह ही टैक्स कानून लागू होंगे।
मौजूदा समय में यह है नियम
मौजूदा समय में अगर कोई भारतीय या भारतीय मूल का व्यक्ति प्रवासी भारतीय के दर्जे को बरकरार रखते हुए भारत में रहता है, तो उस पर उसकी वैश्विक आय पर भारत में कोई कर देनदारी नहीं बनती है। लेकिन अब बजट में वित्त मंत्री ने प्रस्ताव रखा है कि हर भारतीय नागरिक जो अपने निवास या प्रवास की वजह से किसी अन्य देश में कर देने के लिए पात्र नहीं है, उसे प्रवासी भारतीय माना जाएगा।
फिलहाल यह नियम है कि अगर कोई भारतीय नागरिक भारत से 182 दिनों से ज्यादा दुनिया के दूसरे देश में रहता है, तो वह नॉन-रेजिडेंट इंडियन बन जाता है। हालांकि नई व्यवस्था में अगर किसी भारतीय नागरिक को नॉन - रेजिडेंट स्टेटस का फायदा उठाना है, तो उसे भारत में एक साल में 120 दिन से ज्यादा नहीं रहना पड़ेगा। सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट 2020 में प्रावधान किया गया है कि एक भारतीय नागरिक को एनआरआई बनने के लिए भारत से 240 दिन बाहर दुनिया के दूसरे देश में रहना पड़ेगा।