भारतीय जीवन बीमा निगम की पालिसियों पर बीमाधारकों को मिलने वाला बोनस लगातार कम होता जा रहा है। बीमाधारक के जमा धन पर सर्विस टैक्स लगाने का भी निर्देश जारी हो गया है।
वर्ष 2004-05 में जो बोनस 64 से 70 रुपये प्रति हजार मिलता था, अब घटकर 32 से 48 रुपये प्रति हजार पर आ गया है। बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) के निर्देश पर ऐसा हो रहा है।
इरडा ने एलआईसी के बोनस स्वरूप पर ऐतराज जताते हुए इसे रेगुलराइज करने और अधिकतम पांच साल तक की गारंटी देने की सिफारिश की थी।
अब तक एलआईसी पॉलिसी बेचने के लिए अपने तरह से बोनस और गारंटी का निर्धारण करता रहा है। इसके मद्देनजर इरडा ने कई प्रमुख पालिसी को 30 सितंबर 2013 तक पुनर्गठित करने का निर्देश दिया है। पुनर्गठन में पॉलिसी की मैच्योरिटी वैल्यू, बोनस, सर्विस टैक्स सहित अन्य मुद्दों को समाहित किया जाएगा।
एलआईसी वाराणसी मंडल के वरिष्ठ प्रबंधक जेएस टोलिया ने बताया कि हालांकि इधर दो सालों में बोनस की राशि में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। लेकिन इरडा के निर्देेशानुसार पुरानी पालिसियों को पुनर्गठित कर नए स्वरूप में लांच किया जाएगा।
एलआईसी की यह पॉलिसी होंगी पुनर्गठित
इरडा ने एलआईसी पालिसी धारकों के बीच लोकप्रिय एक दर्जन से ज्यादा पॉलिसियों को 30 सितंबर 2013 से नए स्वरूप में लांच करने का निर्देश जारी किया है। यह पॉलिसियां हैं: बंदोबस्ती बीमा, मनी बैक, जीवन सरल, न्यू बीमा गोल्ड, जीवन आनंद, जीवन छाया, बीमा बचत, बीमा निवेश, कोमल जीवन आदि।
'सरकार बीमा धारकों और अभिकर्ताओं के हितों को नजरअंदाज करते हुए विदेशी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसे फैसले ले रही है। लोकप्रिय पुरानी पॉलिसियों को बंद करने और बोनस व गारंटी कम किए जाने के कारण एलआईसी के व्यवसाय पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। सरकार की इन गलत नीतियों के विरोध में एलआईसी के अभिकर्ता देशव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे।'
- शिवलाल ठाकुर, राष्ट्रीय अध्यक्ष, आल इंडिया लाइफ इंश्योरेंस एजेंट्स एसोसिएशन