आज के दौर में सबसे अधिक मांग वाले पाठ्यक्रमों में नामांकन के लिए बेहद मारामारी होती है। आपको परीक्षा में चाहे कितने ही अंक मिले हों, इसकी गारंटी नहीं की आपका नामांकन उस पाठ्यक्रम के लिए हो ही जाए।
सबसे अधिक मांग वाले पाठ्यक्रम में नामांकन के लिए लगभग 99 फीसदी अंकों तक की जरूरत होती है। मौजूदा दौर में प्रतिस्पर्धा भले ही कई गुणा बढ़ गई है, लेकिन दूसरी तरफ कैरियर के विकल्प भी बढ़े हैं। विद्यार्थी प्रतिष्ठित एवं मशहूर पाठ्यक्रम के लिए कतार में लगने के बजाय मौजूदा विकल्पों में से अपने लिए कोई एक चुनकर आगे बढ़ सकते हैं।
आर्थिक रूप से कितने तैयार हैं आप
अगर आपका बच्चा वह पाठ्यक्रम नहीं चुनता, जिसके लिए आपने तैयारी कर रखी है और अंतिम समय पर कोई दूसरा कैरियर चुन लेता है, तो ऐसे में आपके लिए यह जरूरी है कि एक अभिभावक के रूप में आर्थिक रूप से आप कितने तैयार हैं।
आपमें से कई लोग अचानक आए इस खर्च के लिए अपनी रिटायरमेंट पूंजी का इस्तेमाल करने की सोचेंगे। लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि यह आपके जीवन की सबसे बड़ी आर्थिक गलतियों में से एक हो सकती है।
रिटायरमेंट और बच्चे की शिक्षा की योजना हर व्यक्ति के लिए आर्थिक योजना बनाने के दो महत्वपूर्ण पहलू होते हैं। यह समझना जरूरी है कि जीवन के अलग-अलग चरणों में आपके वित्तीय पोर्टफोलियो में इन दोनों का अपना अलग महत्व होगा। विडंबना यह है कि लोग बच्चों की शिक्षा के लिए सेवानिवृत्ति का त्याग करने के इच्छुक हैं।
रिटायरमेंट पूंजी खर्च करने से करें परहेज
लोग अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए अपनी रिटायरमेंट पूंजी का त्याग करने में जरा भी नहीं हिचकिचाते। बच्चे की पढ़ाई के लिए अपनी रिटायरमेंट पूंजी को खर्च करना काफी जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि इससे बुढ़ापे में आपको आर्थिक तनाव के शिकार हो सकते हैं। समय काफी बदल चुका है और संयुक्त परिवार अब न के बराबर देखने मिलता है।
हममें से अधिक लोग सिंगल फैमिली के रूप में रहते हैं। ऐसे में यह संभावना हो सकती है कि आपके बुढ़ापे के समय में बच्चे आपके साथ न रहें, क्योंकि उनके पास आपके शहर से दूर बेहतर करियर का मौका हो सकता है। इसलिए रिटायर होने के बाद आपकी रिटायरमेंट पूंजी ही एकमात्र सहारा बनेगी। अगर आप रिटायरमेंट की बचत पूंजी खर्च कर देंगे, तो भविष्य में तकलीफों को आमंत्रण देंगे।
पहले खुद के लिए बचत करें
आर्थिक योजना बनाने का मूल सिद्धांत है- पहले खुद के लिए बचत करें। जैसा कि वाक्यांश सुझाता है कि आपकी स्वयं की आर्थिक स्थिरता यह सुनिश्चित करने के लिए सबसे अधिक जरूरी होगी कि आप अपने परिवार की आर्थिक ज़रूरतों का ख्याल रख सकें।
अपने रिटायरमेंट को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए सबसे ज़रूरी कदम यही होगा कि जल्द से जल्द बचत की शुरुआत करें। इस तरह से आप अपने रिटायरमेंट के वर्षों के लिए बड़ी पूंजी बना सकते हैं। पूरे अनुशासन के साथ निवेश करने से चक्रवृद्धि की शक्ति आपकी पूंजी बढ़ाएगी।
हमारी यही सलाह होगी कि आप जिस दिन से कमाना शुरू करें, उसी दिन से निवेश की शुरुआत भी करें। आपको यह भी याद रखना होगा कि रिटायर होने के बाद अपनी आर्थिक ज़रूरतों के लिए आप कोई भी लोन नहीं ले सकेंगे। ऐसे में आपके पास एक ही विकल्प बचेगा और वह है रिवर्स मॉर्गेज, जो भारत में वर्तमान दरों के मद्देनजर बिल्कुल भी सही फैसला नहीं होगा।
अपने लिए सोचना स्वार्थ नहीं होगा
अधिकतर भारतीय अभिभावक यह सवाल पूछ सकते हैं कि क्या अपने बच्चे से पहले, जो अपने भविष्य के लिए आप पर निर्भर हैं, खुद के लिए सोचना स्वार्थ नहीं होगा? आपकी भावनाएं आपको अपने बच्चे के लिए सब कुछ कुर्बान करने के लिए कहेंगी। लेकिन आर्थिक समझदारी यही कहती है कि पहले जीवन के उस दौर के लिए बचत करें, जब आपके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं होगा।
इसमें कोई संदेह नहीं है कि बच्चों की शिक्षा हमारे लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बन जाती है, क्योंकि हमारी दुनिया उनके चारों ओर घूमती है। लेकिन हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि ऐसा करते वक्त हमें अपने ध्यान को सेवानिवृत्ति की योजना से दूर नहीं ले जाना चाहिए। इसलिए, अपने बच्चे के जन्म के बाद से ही एक चाइल्ड प्लान में निवेश करना अच्छा होगा।
सचिन सक्सेना
सीनियर वाइस प्रेसिडेंट एवं हेड, प्रोडक्ट्स एवं चैनल मार्केटिंग, मैक्स लाइफ इंश्योरेंस