जिस तरह से हमारी जरूरतें और जीवनशैली बदल रही है, उसी तरह हमें अपने मूलभूत जरूरतों का दायरा भी बढ़ाना चाहिए। यानी, जिस तरह रोटी, कपड़ा, मकान, पानी, बिजली वगैरह हमारे जीवन के लिए जरूरी है, उसी तरह जीवन को असमय आने वाले जोखिम से सुरक्षा देना भी हमारी बेसिक आवश्यकता होनी चाहिए। इस लिहाज से देखें तो अब हमें बीमा पॉलिसी लेने में उतनी ही सजगता और सक्रियता दिखानी चाहिए जितनी हम अन्य जरूरी कार्यों में दिखाते हैं।
अकसर जब बीमे की बात आती है तो आमतौर पर परंपरागत जीवन बीमा को ही लोग पर्याप्त सुरक्षा कवर मान लेते हैं। जबकि, केवल परंपरागत जीवन बीमा ही हमारे लिए पर्याप्त नहीं है। बल्कि, इसके साथ ही हमें स्वास्थ्य बीमा, टर्म जीवन बीमा आदि पर भी विचार करना चाहिए। कुल मिलाकर कहें तो हमें अपना एक विधिवत इंश्योरेंस पोर्टफोलियो बनाना चाहिए। प्राय: यह देखने में आता है कि अधिकांश लोग अपने इंश्योरेंस पोर्टफोलियो को लेकर सजग नहीं रहते हैं।
एक बार बीमा कराने के बाद उन्हें उसकी तबतक याद नहीं आती जबतक या तो रिटर्न भरने की जरूरत न पड़े या बीमे की अवधि न पूरी हो जाए। यह किसी भी पॉलिसीधारक के लिए व्यावहारिक रवैया नहीं है। दूसरी ओर, यदि आप कोई पॉलिसी खरीदने जा रहे हैं, तो आपने उसका चयन किस आधार पर किया है। सिर्फ एजेंट के कहने पर बीमा पॉलिसी खरीदने में समझदारी नहीं है।
इस पहलू पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। क्योंकि, इस बात की पूरी गुंजाइश है कि बीमा एजेंट अपने फायदे के मुताबिक आपको बीमा पॉलिसी बेचे। इसलिए आवश्यक है कि आप अपनी जरूरत को खुद समझें और पॉलिसी का चयन करें।