डूबते कर्ज से परेशान सरकारी बैंकों ने एक बार फिर पर्सनल लोन पर सख्ती शुरू कर दी है। बैंकों के इस कदम से कंज्यूमर ड्यूरेबल उत्पाद, यात्रा, त्योहार और आकस्मिक जरूरतों के लिए मिलने वाले कर्ज पर असर पड़ेगा।
बैंकर्स के अनुसार पर्सनल लोन में गारंटी न होने और मौजूदा ऊंची ब्याज वाले दौर में कर्ज डूबने का खतरा बढ़ा है, जिसे देखते हुए वह इस तरह के कर्ज देने में काफी सतर्कता बरत रहे हैं।
वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने एक साल पहले बैंकों को मांग बढ़ाने के लिए पर्सनल लोन पर जोर देने को कहा था। इसके बाद सरकारी बैंकों ने खास तौर से एलसीडी, रेफ्रीजरेटर जैसे होम अप्लायंसेज के लिए कर्ज देने का इश्तहार भी देना शुरू कर दिया था। अब एक बार फिर इस तरह के कर्ज देने में बैंक काफी चुनिंदा हो गए हैं।
पंजाब नेशनल बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार पर्सनल लोन में काफी जोखिम होता है। मौजूदा दौर में होम लोन, ऑटो लोन आदि में डिफॉल्ट हो रहे हैं। ऐसे में बिना गारंटी वाले पर्सनल लोन पर जोखिम काफी बढ़ गया है, जिसे देखते हुए बैंक काफी चुनिंदा होकर कर्ज दे रहा है।
खास तौर से ऐसे लोगों को ही कर्ज दे रहा है, जिनका वेतन खाता (सेलरी अकाउंट) बैंक के पास है, क्योंकि इसमें जोखिम काफी कम होता है। इंडियन बैंक के अधिकारी ने बताया कि पर्सनल लोन पर काफी जोखिम रहता है, ऐसे में बैंक बहुत आक्रामक रणनीति के तहत कर्ज नहीं दे रहा है।
पंजाब एंड सिंध बैंक के अधिकारी के अनुसार इस तरह के कर्ज की मांग भी कम हुई है। एक तो ब्याज दरें ज्यादा हो गई हैं, दूसरे पर्सनल लोन के तहत कर्ज की राशि भी ज्यादा नहीं होती है। ऐसे में बैंकों के लिए आक्रामक रणनीति अपनाना फायदेमंद नहीं है।
देश के प्रमुख बैंक इस समय पर्सनल लोन 15 से 21 फीसदी के ब्याज पर दे रहे हैं। इसमें भी उनकी तरजीह ऐसे ही लोगों को हैं, जो वेतनभोगी है। पहले बैंक कारोबारी, पेशेवर आदि को भी कर्ज देने में सख्ती नहीं करते थे, पर अब इस तरह के वर्ग को कर्ज देने में बैंक हिचक रहे हैं।