अधिक टैक्स का भुगतान
एफडी पर ब्याज से होने वाली कमाई करयोग्य होती है। इस पर कमाई के साथ जोड़कर स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। हालांकि, अगर आपकी उम्र 60 साल से अधिक है तो आयकर कानून की धारा 80टीटीबी के तहत एफडी पर ब्याज के रूप में होने वाली कमाई पर 50,000 तक की छूट मिलती है।
महंगाई
महंगाई हर प्रकार के निवेश को प्रभावित करती है और जोखिम भी बढ़ाती है। मान लीजिए, कोई बैंक एफडी पर 8 फीसदी ब्याज दे रहा है और उस समय महंगाई की दर 7% है तो आपको जमा पर वास्तविक रिटर्न सिर्फ एक फीसदी ही मिल रहा है। एफडी पर बाजार के उतार-चढ़ाव का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। लेकिन, वास्तविक रिटर्न महंगाई के हिसाब से बढ़ता या घटता रहता है।
फिर से निवेश पर कम ब्याज
एफडी मैच्योर होने पर आपके पास दो विकल्प होते हैं। पहला...आप पैसे निकाल लें। दूसरा...एफडी के रूप में फिर से निवेश कर दें। आप चाहें तो नई एफडी भी खुलवा सकते हैं, लेकिन इस पर उतना ही ब्याज मिलेगा, जो अभी लागू है। इस कदम से आपके दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्यों पर जोखिम बढ़ जाएगा क्योंकि इस एफडी पर पहले की तरह आपको ज्यादा ब्याज पर नहीं मिलेगा।
महंगाई सहित अन्य कारकों का रखें ध्यान
एफडी कराते समय महंगाई, डिफॉल्ट, रिटर्न, टैक्स देनदारी की जरूर गणना करें। पूरी रकम कभी भी एफडी में न डालें। ऐसे साधनों में भी निवेश करें, जहां से जरूरत पड़ने पर आपको पूंजी मिल जाए। -रत्नेश सिंह, निवेश एवं बीमा सलाहकार