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कोरोना ने बिगाड़ी देश की आर्थिक स्थिति, निवेशकों के लिए जरूरी है एसेट एलोकेशन

Sun, 02 May 2021 03:19 PM IST
‌डिंपल अलावाधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आगामी महीनों में बाजार में भारी उतार-चढ़ाव रह सकता है। ऐसे में निवेशकों के पास इस जोखिम से बचाव का एक ही तरीका है, गतिशील नजरिए से एसेट एलोकेशन। यानी जरूरत के हिसाब से किसी एक एसेट क्लास में निवेश घटाना और दूसरे एसेट क्लास में निवेश बढ़ाना।
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रुपये - फोटो : pixabay
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विस्तार
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कोरोना वायरस ने देश की आर्थिक स्थिति बिगाड़ दी है। महामारी के इस दौर में कई कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को नौकरी से निकाला, वहीं कई कर्मचारियों की सैलरी में कटौती की गई। सरकार द्वारा बनाए गए कड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य है। बहुत से लोग हैं, जिनकी आमदनी प्रभावित हुई है। लोगों ने अपने खर्चे भी बहुत कम कर दिए हैं, लेकिन कई ऐसे खर्चें होते हैं, जो बेहद जरूरी होते हैं और उन्हें रोका नहीं जा सकता। 

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देश में कोरोना वायरस महामारी तेजी से फैल रही है। इसलिए निकट अवधि के लिए बाजार का सेंटिमेंट कमजोर बना हुआ है। चूंकि हम पिछले साल भी ऐसी स्थिति का सामना कर चुके हैं, लिहाजा हमारा मानना है कि कॉर्पोरेट और निवेशक, दोनों उन चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर तरीके से तैयार हैं, जिनका सामना आने वाले समय में करना पड़ सकता है। सभी को उम्मीद है कि कुछ समय बाद हम कोरोना संक्रमण के नए मामलों में गिरावट आएगी और वैक्सीनेशन के आंकड़े तेजी से बढ़ते हुए दिखेंगे।

एसेट एलोकेशन है जरूरी
आगामी महीनों में बाजार में भारी उतार-चढ़ाव रह सकता है। ऐसे में निवेशकों के पास इस जोखिम से बचाव का एक ही तरीका है, गतिशील नजरिए से एसेट एलोकेशन। यानी जरूरत के हिसाब से किसी एक एसेट क्लास में निवेश घटाना और दूसरे एसेट क्लास में निवेश बढ़ाना। निवेशक को सिर्फ एक ही विकल्प में निवेश नहीं करना चाहिए। विभिन्न विकल्पों में अपने पैसे लगाने चाहिए, ताकि उनके सारे पैसे डूब न जाएं। एसेट एलोकेशन स्कीम या बैलेंस्ड एडवांटेज कैटेगरी के फंड अच्छा विकल्प हो सकते हैं। इस तरह के फंड बाजार में उतार-चढ़ाव का फायदा उठाने में कामयाब रहते हैं।
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महंगाई का रखें ध्यान
समय के साथ महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। निवेश करते समय बढ़ती महंगाई दर को ध्यान में रखना जरूरी है। ऐसा नहीं करना आपके निवेश और वित्तीय प्लानिंग को बिगाड़ सकता है। बहुत से लोग नौकरी के कई साल बाद निवेश शुरू करते हैं। अधिकांश लोग 40-45 साल में वित्तीय योजना बनाने की शुरुआत करते हैं। अगर वह इस निवेश को 24-25 साल की उम्र में नौकरी लगते ही शुरू करते हैं, तो उन्हें आगे चलकर ज्यादा फायदा होता है। वे ज्यादा फंड जमा कर पाते हैं। 

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