कोरोना संकट के कारण आर्थिक गतिविधयां ठप पड़ी हैं। कारोबार बंद होने से लोगों को पैसे की किल्लत हो रही है। इससे आंशिक राहत देने के लिए सरकार ने पीएफ और एनपीएस से निकासी की सुविधा दी है। इसके अलावा, आप जीवन बीमा के यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (यूलिप) और यूनिट-लिंक्ड एंडोमेंट प्लान से भी निकासी कर सकते हैं। यह सुविधा पारंपरिक जीवन बीमा योजनाओं में नहीं है। इस संबंध में हाल ही में भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) ने नई गाइडलाइन जारी की है। इसमें सम एश्योर्ड राशि का अधिकतम 25 फीसदी निकाल सकते हैं। निकासी पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। हालांकि, इसका असर आपके सम एश्योर्ड पर पड़ेगा।
ऐसे समझें आंशिक निकासी का गणित
- मान लीजिए आपने एक यूलिप प्लान लिया है, जिसका सम एश्योर्ड 5 लाख रुपये है और सालाना प्रीमियम 30,000 रुपये है।
- पांच साल में आपने 1.5 लाख रुपये जमा किया और इस पर ब्याज मिलाकर आपकी फंड वैल्यू 2 लाख रुपये हो गई। अब जरूरत पड़ने पर आप फंड वैल्यू की अधिकतम 25 फीसदी राशि यानी 50,000 रुपये निकाल सकते हैं।
- इस स्थिति में सम एश्योर्ड 5 लाख से घटकर 4.5 लाख हो जाएगा। निकासी के दो साल की अवधि के दौरान अगर पॉलिसीधारक की मौत हो जाती है तो नॉमिनी को 4.5 लाख रुपये ही मिलेंगे।
...तो नहीं पड़ेगा सम एश्योर्ड पर असर
- राशि निकालने के बाद भी अगर चाहते हैं कि सम एश्योर्ड पर असर न पड़े, इसके लिए पॉलिसीधारक को अगले दो साल तक प्रीमियम जमा करते रहना होगा।
- 25 फीसदी राशि ही निकाल सकते हैं अधिकतम फंड वैल्यू की, निकासी की शर्तें
पॉलिसी की अवधि के 5 साल पूरे होने चाहिए।
- पॉलिसीधारक की उम्र कम-से-कम 18 साल होनी चाहिए।
- बच्चों की उच्च शिक्षा, बेटा/बेटी की शादी, गंभीर बीमारी, मकान या प्रॉपर्टी खरीदने के लिए सुविधा।
- पॉलिसी अवधि के दौरान तीन बार ही निकाल सकते हैं फंड वैल्यू की 25 फीसदी रकम।
- फंड में एक साल का प्रीमियम बचा हो।