1 जुलाई से लागू होने वाले जीएसटी कानून में बिस्किट और कन्फेक्शनरी पर ज्यादा टैक्स की मार से बचने के लिए देश के सबसे बड़े निर्माता पारले ने इसका तोड़ निकाल लिया है। कंपनी अब रिटेल में दालों के कारोबार में उतर गई है, क्योंकि जीएसटी में दालों पर टैक्स की दर को काफी कम रखा गया है।
फ्रेश हार्वेस्ट के नाम से लांच किया ब्रांड
पारले ने दालों को बेचने के लिए फ्रेश हार्वेस्ट के नाम से अपना ब्रांड लांच किया है, जिसको फिलहाल महाराष्ट्र में बेचा जा रहा है। कंपनी पूरे राज्य में 5 लाख से अधिक शहर, देहात और गांव में मौजूद रिटेल आउटलेट्स, रिटेल चेन और सेल्फ सर्विस स्टोर के जरिए अपनी दालों को बेच रही है। अगले एक साल में पूरे देश में कंपनी अपने ब्रांड की दालें बेचने लगेगी।
कंपनी ने शुरू किया इन दालों का कारोबार
पारले फिलहाल जिन दालों को बेच रही है उनमें अरहर, मूंग, उड़द, चना और मसूर शामिल है। पारले के कैटेगिरी हेड मयंक शाह ने फाइनेंशियल एक्सप्रेस को बताया कि आज के दौर में अचार से लेकर के आटा तक ब्रांडेड मिल रहा है, जिसमें काफी कम कंपनियां मौजूद हैं।
इन कंपनियों से मिलेगी सीधी टक्कर
पारले को इस सेगमेंट में जिन कंपनियों से सीधी टक्कर मिलेगी, उनमें पतजंलि, टाटा केमिकल्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा शामिल हैं। यह सभी कंपनियां फिलहाल ऑर्गेनिक दालों का कारोबार कर रही हैं, जिसमें इनको अच्छी सेल्स देखने को मिल रही है।
जीएसटी के बाद महंगा हो जाएगा पारले जी
शाह ने कहा कि जीएसटी के लागू हो जाने के बाद कंपनी का फ्लैगशिप ब्रांड पारले-जी बिस्किट के दाम 5-7 फीसदी बढ़ जाएंगे। कंपनी दालों के बाद बेसन और मैदा के कारोबार में उतरने के लिए प्लानिंग कर रही है।