तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक और इसके सहयोगी देशों ने साल, 2021 के दौरान कच्चे तेल की मांग में कमी आने की आशंका जताई है। एक न्यूज एजेंसी ने खुफिया दस्तावेज के मुताबिक, ओपेक ने अपने संशोधित आंकलन के पहले लगाए गए अनुमान की अपेक्षा मांग में कमी रहने की बात कही है। इसके चलते अगले साल कच्चे तेल की सप्लाई में कटौती की संभावना बढ़ गई है।
ओपेक की ज्वाइंट टेक्निकल कमेटी (जेटीसी) की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2021 में तेल की मांग में 6.2 मिलियन बैरल प्रति दिन के हिसाब से इजाफा होने की उम्मीद है। यह पहले लगाए गए अनुमान से 0.3 मिलियन बैरल कम है। ओपेक और उसके सहयोगी देशों के बीच बीते सोमवार को एक वर्चुअल बैठक हुई। यह बैठक मंगलवार को होने वाली मिनिस्ट्रियल मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक से ठीक पहले हुई है। इस आगामी बैठक में नीतिगत फैसले लिए जाने की संभावना है।
इससे पहले, संगठन ने जनवरी से उत्पादन में दो मिलियन बीपीडी तक इजाफा करने की बात कही थी, जो वैश्विक खपत का दो फीसदी है। लेकिन मांग में कमी की आशंका के बीच संगठन उत्पादन बढ़ाने पर फिर से विचार कर रहा है। बता दें कि इस साल संगठन ने उत्पादन में रिकॉर्ड कटौती की है।
सूत्रों के मुताबिक, ओपेक और इसके सहयोगी देश पहले से निर्धारित 7.7 मिलियन बीपीडी उत्पादन को तीन से छह महीने तक बनाए रखने पर विचार कर सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि अगर उत्पादन में कटौती को मार्च, 2021 तक बनाए रखा गया, तो ओईसीडी का कॉमर्शियल तेल भंडार 73 मिलियन बैरल तक गिर सकता है। इस कटौती को अगर जून तक तक जारी रखा गया, तो यह भंडार 21 मिलियन बैरल तक गिर जाने की संभावना है।
बता दें कि 2021 के लिए उत्पादन नीति पर विचार करने के लिए ओपेक और इसके सहयोगी देश 30 नवंबर और एक दिसंबर को बैठक करने वाले हैं। इस बैठक में नीतिगत फैसले लिए जाने हैं।