भारत में महज 32 फीसदी लोग खुद के खरीदे घरों में रहते हैं और 56 फीसदी लोग निकट भविष्य में घर खरीदने की योजना नहीं बना रहे हैं। इसका खुलासा इंडिया मोर्गेज गारंटी कारपोरेशन (आईएमजीसी) के एक सर्वेक्षण से हुआ है।
सर्वे को राष्ट्रीय आवास बैंक (एनएचबी) के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीराम कल्याणरमन और आईएमजीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताव मेहरा ने बृहस्पतिवार को यहां जारी किया।
‘आईएजीसी होम हंट 1.1’ नाम से जारी इस सर्वेक्षण के मुताबिक, देश के 56 फीसदी लोग निकट भविष्य में घर खरीदने की योजना नहीं बना रहे हैं। सर्वे में घर नहीं खरीदने के चार मुख्य कारण बताए गए हैं।
उनमें 38 फीसदी लोगों ने उच्च ब्याज दर, 38 फीसदी ने बचत नहीं होना और कहीं से उधार लेने से हिचक, 32 फीसदी ने संपत्ति की ऊंची दर और 32 फीसदी लोगों ने कर्ज की अपर्याप्त उपलब्धता को घर नहीं खरीदने का मुख्य कारण बताया। उन्हें लगता है कि जीवन के शुरुआती दिनों में घर खरीदने के बदले अन्य आवश्यकताएं पूरी करना ज्यादा जरूरी है।
श्रीराम कल्याणरमन ने बताया कि देश में जो वर्ष 2022 तक सबके लिए आवास का लक्ष्य तय किया गया है, उसमें आवासीय क्षेत्र का काफी विकास होने वाला है। इसमें भी कम लागत वाले मकानों की ज्यादा मांग होगी।
तभी तो केंद्र सरकार ने आवासीय क्षेत्र को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा दिया है ताकि इस क्षेत्र को सस्ता और आसानी से कर्ज मिल सके।
इस सर्वेक्षण में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बंगलूरू, जयपुर, इंदौर समेत 14 शहरों के लोगों को शामिल किया गया है।