जिन बैंकों के फर्जी ऐप्स होने की बात रिपोर्ट में कही गई है उनमें भारतीय स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, सिटी बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और यस बैंक हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन फर्जी ऐप्स से ग्राहकों के डेबिट व क्रेडिट कार्ड की डिटेल्स भी चोरी हो गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ये ऐप कैश बैक, नि:शुल्क मोबाइल डाटा और बिना ब्याज के कर्ज समेत पुरस्कार का वादा कर उपभोक्ताओं को डाउनलोड, इंस्टॉल और इस्तेमाल के लिए प्रलोभन देते हैं।
महत्वपूर्ण डाटा की पहचान
सबसे पहले व्यवसाय में इस्तेमाल हो रहे यूजर्स के महत्वपूर्ण डाटा की पहचान करनी चाहिए। इससे हमें उस डाटा के बारे में जानकारी हो जाती है, जिसे सबसे ज्यादा सुरक्षा की जरूरत होती है। इसके लिए डाटा लॉस प्रिवेन्शन सॉफ्टवेयर (डीएलपी) का इस्तेमाल करना चाहिए।
इस तरह के महत्वपूर्ण डाटा किसी भी योजना का ब्लू-प्रिंट, वित्तीय लेखा-जोखा या फिर किसी भी तरह की निजी तस्वीरें भी हो सकती हैं। डीएलपी सॉफ्टवेयर सुरक्षित की जाने वाली जानकारियों को वर्गीकृत कर देता है, जिसके बाद संस्था या आपको उसकी सुरक्षा के लिए एक योजना के तहत अत्यंत ही महत्वपूर्ण जानकारियों के रख-रखाव की उचित व्यवस्था करनी होती है। यह एक तरह का उत्कृष्ट उपाय है, जिसकी मदद से आप सभी महत्वपूर्ण जानकारियों को हानि पहुंचने से बचा सकते हैं।