दूरसंचार मंत्रालय ने इस योजना को देश में इंटरनेट और डाटा के विस्तार के मद्देनजर किया है। माना जा रहा है कि इस्तेमाल करने वालों की तादाद बढ़ने पर डाटा की दरों में कमी आएगी। मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, जुलाई में इस व्यवस्था को लागू किया जाना है।
इसके बाद पीसीओ की तर्ज पर पीडीओ आपको हर गली-मोहल्ले में देखने को मिलेंगे। अधिकारी के मुताबिक, इससे डिजिटल इंडिया, डिजिटल भुगतान सहित अन्य सरकारी योजनाओं को गति मिलेगी। उन्होंने बताया कि कूपन का इस्तेमाल की अवधि 30 मिनट से पूरे दिन के इस्तेमाल की रखी गई है और इसका भुगतान पेटीएम मोबाइल वॉलेट, भीम समेत अन्य के जरिये किया जा सकेगा। मौजूदा समय में 11 कंपनियां 415 स्थानों पर इसकी पायलट परियोजना शुरू करेंगी।
ट्राई की पायलट परियोजना रही सफल
मंत्रालय के मुताबिक, दूरसंचार नियामक ट्राई द्वारा किए गए पायलट परियोजना को पूरी सफलता मिली है। साथ ही दूरसंचार आयोग की ओर से इसके मद्देनजर की गई ट्राई की सिफारिशों को मंजूरी प्रदान कर दी गई है। सीओएआई के डीजी राजन मैथ्यूज का कहना है कि दूरसंचार विभाग पीडीओ के व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए जल्द दिशा-निर्देश जारी करेगा। इनके आने के बाद कोई भी पब्लिक वाई-फाई एक्सेस प्वाइंट बना सकेगा।
लाखों लोगों को मिलेगा रोजगार
गौरतलब है कि ट्राई के मुताबिक, ऐेसे वाई-फाई हॉट स्पॉट लगने से दूरसंचार कंपनियों के नेटवर्क पर से बेवजह की बाधा हटेगी और लाखों लोगों को इससे रोजगार भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि नई गाइडलाइंस के बाद गूगल, फेसबुक जैसी कंपनियां भी ग्राहकों को ये सेवाएं दे सकेंगी, जिसका टेलीकॉम कंपनियां विरोध कर रही हैं। जानकारों के मुताबिक गूगल, फेसबुक जैसी कंपनियां अगर यह सेवाएं देती हैं, तो नेट न्यूट्रैलिटी के नियमों का उल्लंघन होगा। विशेषज्ञ निखिल पाहवा के अनुसार, पीडीओ से न सिर्फ नई डाटा क्रांति आएगी, बल्कि लाखों लोगों को नए रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।