वाणिज्य मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी के मुताबिक, फिलहाल नीति तैयार होने की प्रक्रिया में है। हमारा इरादा पूरी तरह संतुलित नियम और कायदे लागू करना है। मौजूदा मसौदे में ऐसी कोई सिफारिश नहीं है, जिससे ई-कॉमर्स बाजार प्रभावित होगा। यह अलग मुद्दा है कि यह बाजार पहले बिना नियम के चल रहा था। नई नीति से ग्राहकों के हितों की रक्षा सहित अन्य व्यवस्था कायम होगी।
बीटूसी में एफडीआई पर विचार
अधिकारी ने कहा कि इस क्षेत्र में एफडीआई को बिजनेस-टू-कंज्यूमर (बीटूसी) स्तर पर मंजूर किए जाने पर भी विचार किया जा रहा है। लंबे विचार-विमर्श के बाद इस नीति का मसौदा तैयार किया गया है। लेकिन अभी यह सिर्फ मसौदा है, अंतिम निर्णय नहीं। ई-कॉमर्स पर राष्ट्रीय नीति का मसौदा तैयार करने के लिए अप्रैल 2018 में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री के नेतृत्व में एक थिंक टैंक का गठन किया गया था, इस पर विभिन्न हिस्सेदारों की राय मांगी गई है।
गौरतलब है कि मसौदे में ई-कॉमर्स की परिभाषा तय करने की बात भी कही गई है। इससे घरेलू स्तर पर नीति बनाने में मदद मिलेगी। अभी आईटी, डब्ल्यूटीओ, ओईसीडी और यूएनसीटीएडी में इसके लिए अलग-अलग परिभाषाएं हैं। ई-कॉमर्स में एमएसएमई क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के लिए भी कई कदम उठाने की भी सिफारिश की गई है।