डीआईपीपी के एक अधिकारी के मुताबिक मंत्रालय द्वारा तैयार दिशा-निर्देशों पर विभाग गौर कर रहा है, जिसमें और एक-दो पहलुओं को जोड़ा जा सकता है। इसके साथ ही उपभोक्ता से जुड़े निर्देशों को अधिकतम एक पेज का रखे जाने पर सहमति बनी है।
इन्हें ई-कॉमर्स कंपनियों को अपने पोर्टल में प्रदर्शित करने के लिए भी कहा जा सकता है या फिर बिल तैयार होने के दौरान उपभोक्ताओं को दर्शाने को कहा जा सकता है। साथ ही बिल का एक फार्मेट सभी कंपनियों के लिए निर्धारित किया जाएगा। इसके अलावा नकद खरीद पर पावती मुहैया कराने भी शामिल होगा।
42 फीसदी बढ़ी शिकायतें
अधिकारी ने बताया कि दिशा-निर्देशों का अनुपालन नहीं करने की स्थिति में आर्थिक दंड का प्रावधान होगा। इसके अलावा उपभोक्ता शिकायत निवारण के लिए स्पष्ट व्यवस्था भी जारी करनी होगी। इन कदमों के जरिए उपभोक्ता हितधारी स्थिति कायम की जा सकेगी। कंपनियों को छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी शिकायत को 30 दिन से 45 दिन के भीतर कारण स्पष्ट करते हुए निपटाना होगा।
गौरतलब है कि 2017-18 में ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ शिकायतों में 42 फीसदी का इजाफा हुआ है। एक रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा वर्ष के अंत तक देश में ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों की संख्या 12 करोड़ हो जाएगी।
जबकि पिछले वित्त वर्ष तक ऑनलाइन बाजार में 10.8 करोड़ उपभोक्ता थे। अनुमान है कि वर्ष 2020-21 तक ई-कॉमर्स कारोबार 2.5 लाख करोड़ से 2.7 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।