जियो ने बढ़ाया रिलायंस इंडस्ट्रीज का शुद्ध लाभ
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने वित्त वर्ष 2019 की चौथी तिमाही में 10300 करोड़ रुपये से ज्यादा का शुद्ध लाभ अर्जित किया। कंपनी की आय बढ़ाने में रिटेल, मीडिया और डिजिटल बिजनेस का सबसे बड़ा हाथ रहा। कंपनी को अपने कोर बिजनेस ऑयल रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल सेगमेंट में कमजोरी के बावजूद रिटेल और टेलिकॉम बिजनेस में शानदार रेवेन्यू का खासा फायदा मिला। कंपनी ने गुरुवार को एक बयान के माध्यम से यह जानकारी दी।
अंबानी को हुआ 10362 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ
रिलायंस की पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में आय 1.2 लाख करोड़ रुपये थी, जो इस बार बढ़कर 1.38 लाख करोड़ रुपये हो गई। वहीं शुद्ध लाभ इस बार 10362 करोड़ रुपये रहा। पिछले वित्त में शुद्ध लाभ 9438 करोड़ रुपये था। आरआईएल की आय में 9.79 फीसदी का इजाफा देखने को मिला।
जियो की आय में हुई अप्रत्याशित वृद्धि
इस दौरान रिलायंस जियो की आय 723 करोड़ रुपये से बढ़कर 2964 करोड़ रुपये हो गई है। इस तरह से इसकी आय में 65 फीसदी की वृद्धि देखने को मिली है। जियो का शुद्ध लाभ पिछले साल 510 करोड़ रुपये था, जो इस बार बढ़कर 840 करोड़ रुपये हो गया। जियो का एआरपीयू 126.2 रुपये था।
इंटरनेट डाटा नया ऑयल है - अंबानी
अनिल अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज का मुख्य कारोबार तेल और गैस है। इससे रिलायंस को 60 अरब डॉलर यानी 4.16 लाख करोड़ रुपये का रेवेन्यू मिलता है। हालांकि, अंबानी का कहना है कि 'इंटरनेट डाटा नया ऑयल है।'
अंबानी ने किया था ये बड़ा एलान
हाल ही में अमेजन, अलीबाबा और फ्लिपकार्ट जैसी विश्वस्तरीय ई-कॉमर्स कंपनियों से टक्कर लेने के लिए मुकेश अंबानी ने नया एलान किया था। रिलांयस इंडस्ट्रीज ने इन ई-कॉमर्स वेबसाइट्स से अपने उत्पादों को हटाना शुरू कर दिया है।
कंपनी ने उठाया ये बड़ा कदम
रिलायंस कई विदेशी ब्रांड्स को बेचता है। यह ब्रांड्स अमेजन और फ्लिपकार्ट के अलावा मिंत्रा, जबोंग व टाटा क्लिक पर भी बिकते हैं। अब कंपनी अपने उत्पादों को यहां से हटाने लगी है। रिलायंस रिटेल के पास कई इंटरनेशनल ब्रांड्स जैसे कि डीजल, केट स्पेड, स्टीव मॉडेन, बरबेरी, कानाली, एम्पोरियो अरमानी, फुर्ला, जिम्मी छू और मॉर्क्स एंड स्पेंसर शामिल हैं।
दुनिया का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म तैयार कर रहे हैं अंबानी
रिलायंस के पास फिलहाल अपना एक पोर्टल है, जिसके जरिए वो कपड़े व लाइफस्टाइल के उत्पाद बेचती है। रिलायंस ट्रेंड और रिलायंस ब्रांड्स से कहा गया है कि वो सभी उत्पादों को अन्य सभी वेबसाइट्स से हटाना शुरू कर दे। नए वेंचर के जरिए रिलायंस तीन करोड़ व्यापारियों को अपने साथ जोड़ेगी। हालांकि यह ऑनलाइन-ऑफलाइन वेंचर होगा, जिसके जरिए लोग किसी भी तरह से उत्पाद खरीद सकेंगे। दरअसल रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा है कि कंपनी दुनिया का सबसे बड़ा ऑनलाइन-ऑफलाइन प्लेटफॉर्म तैयार कर रही है।
इस संदर्भ में अंबानी ने कहा कि हम हाइब्रिड, ऑनलाइन-टू-ऑफलाइन नए कॉमर्स प्लेटफॉर्म क्रिएशन में अपनी ग्रोथ देखते हैं। रिलायंस लोगों की जिंदगी को आसान बनाने और लघु और मध्यम उद्योगों के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के एक्सेस के लिए काम कर रहा है।’
तीन साल में बनेगा सिरमौर
कंपनी के सूत्रों के अनुसार रिलायंस इस नई कंपनी के लांच होने के तीन साल बाद यानी 2022 तक ई-कॉमर्स मार्केट का लीडर बन जाएगी। ई-कॉमर्स वेंचर के जरिए रिलायंस मोबाइल फोन, कंज्यूमर इलेक्ट्रोनिक्स, किराना, फल-सब्जी सहित अन्य खाने-पीने का सामान बेचेगी।
अंबानी को करना पड़ेगा इन चुनौतियों का सामना
जाहिर सी बात है कि अगर मुकेश अंबानी का सपना इतना बड़ा है, तो चुनौतियां भी बहुत होंगी। मुकेश अंबानी के लिए सबसे बड़ी चुनौती वेयरहाउस और वेंडर्स साबित हो सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अंबानी को बड़े पैमाने पर वेयरहाउस खोलने होंगे ताकि सामानों की अच्छी संख्या में स्टोरेज हो सके। इतना ही नहीं, मुकेश अंबानी के लिए ग्राहकों तक समय पर सामान को पहुंचाना भी चुनौती हो सकती है। देशभर में रिलायंस के कारोबार का फैलाव होने के बावजूद प्रोडक्ट्स से जुड़े वेंडर्स जोड़ना भी अंबानी के लिए बड़ी चुनौती होगी।