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त्योहारी सीजन में बिके 21 हजार करोड़ के गीजर, टोस्टर जैसे घरेलू उपकरण

Thu, 24 Oct 2019 09:40 AM IST
paliwal पालीवाल शिशिर चौरसिया, नई दिल्ली

सार

  • 30 फीसदी तक बढ़ी छोटे घरेलू उपकरणों की बिक्री
  • ऑनलाइन या ई-कॉमर्स वेबसाइट पर ज्यादा मांग
  • धनतेरस पर भी अच्छी बिक्री की उम्मीद लघु एवं मध्यम दर्जे के उद्यमियों का बढ़ रहा कारोबार 
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सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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अर्थव्यवस्था में सुस्ती की खबरों के बीच छोटे घरेलू उपकरणों की बिक्री में तेजी सरकार के लिए राहत की बात है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस त्योहारी सीजन के दौरान मिक्सर, जूसर, ग्राइंडर, टोस्टर, सैंडविच मेकर, प्रेस और ओवन जैसे छोटे घरेलू उपकरणों की बिक्री में 25 से 30 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है। हालांकि, इसमें से अधिकतर बिक्री ऑनलाइन या ई-कॉमर्स वेबसाइट और संगठित बड़े स्टोर चेन के जरिए हुई है। 

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छोटे घरेलू उपकरण उद्योग के जानकार एवं महाराजा व्हाइटलाइन के पूर्व एमडी सुनील वाधवा का कहना है कि दशहरा और दिवाली के दौरान उम्मीद से अच्छी बिक्री हुई है। जिस प्रकार अर्थव्यवस्था में सुस्ती की बात कही जा रही है, उसे देखते हुए 10-15 फीसदी बिक्री बढ़ने की उम्मीद थी।

धनतेरस से पहले तक करीब 21 हजार करोड़ रुपये के छोटे घरेलू उपकरण बिक चुके हैं। धनतेरस पर भी अच्छी बिक्री की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि छोटे घरेलू उपकरण बनाने वाली अधिकतर कंपनियां लघु एवं मध्यम उद्योग के दायरे में आती हैं। इसका मतलब है कि लघु एवं मध्यम दर्जे के उद्यमियों का कारोबार भी बढ़ रहा है।

पारंपरिक दुकानदारों के यहां सुस्ती

दिवाली के आसपास ऐसे उपकरणें की बिक्री भले ही बढ़ी हो, लेकिन इसमें पारंपरिक दुकानदारों की हिस्सेदारी काफी कम है। वाधवा का कहना है कि अधिकतर बिक्री अमेजन, फ्लिपकार्ट, स्नैपडील, शॉप क्लूज और टाटा क्लिक जैसी ई-कॉमर्स वेबसाइट के जरिए हुई।

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वहीं, बड़े शहरों में बिग बाजार के ई-जोन, रिलायंस डिजिटल, क्रोमा और विजय स्टोर जैसे संगठित चेन के जरिए बिक्री हुई। इस कारण इन स्टोर पर अधिक छूट मिलना है। उन्होंने कहा कि अधिकतर छोटे दुकानदार छूट देने में आनाकानी करते हैं, इसलिए ग्राहक ऑनलाइन या बड़े स्टोर से खरीदारी करना ज्यादा बेहतर समझते हैं। 

ऑनलाइन जैसी डील मांगते हैं ग्राहक

कृष्णा सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक कुशेंद्र गर्ग का कहना है कि अधिकतर ग्राहक जब खरीदारी करने आते हैं तो ऑनलाइन या ई-कॉमर्स वेबसाइटों से सामानों की कीमतों की तुलना करते हैं। साथ ही उन वेबसाइटों जितनी छूट मांगते हैं।

कई बार तो देखा गया है कि ऑनलाइन वेबसाइटों पर किसी सामान की कीमत उतनी ही होती है, जितने मूल्य में वह फैक्ट्री से आ रहा है। ऑनलाइन या ई-कॉमर्स वेबसाइट वितरक से सामान लेते हैं, जिसमें वितरकों का मार्जिन भी 10 फीसदी होता है। उन्होंने बताया कि अधिक छूट मिलने की वजह से ग्राहक पारंपरिक दुकानों से खरीदारी के बदले ऑनलाइन या ई-कॉमर्स वेबसाइटों का रुख करते हैं। इसका बिक्री पर काफी असर पड़ता है। 

अर्थव्यवस्था में कहीं नहीं है सुस्ती

नीति आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि छोटे घरेलू उपकरणों की खरीदारी वही लोग करते हैं, जिनके घर में अभी तक इस तरह के उपरकण नहीं है। इससे साफ जाहिर है कि त्योहारी सीजन में अभी जितनी खरीदारी हुई है, उनमें अधिकतर ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में हुई होगी।

अगर शहरों में भी इसकी बिक्री बढ़ी है तो वह निम्न मध्यम परिवार में ही हुई होगी। इससे यह भी पता चलता है कि सुस्ती की जो बात की जा रही है, वह काल्पनिक है। उन्होंने कहा कि अगर वास्तव में सुस्ती का दौर होता तो  त्योहारी सीजन में बिक्री के ये आंकड़े सामने नहीं आते। 

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