केंद्र सरकार एक दिसंबर से राष्ट्रीय राजमार्गों पर फास्ट टैग के जरिए टोल कलेक्शन करने का एलान कर चुकी है। लोगों से कहा जा रहा है कि वो फास्ट टैग को खरीद करके अपनी गाड़ी पर लगा लें, अन्यथा दिसंबर से उनको टोल प्लाजा पर नकद भुगतान करने पर दोगुना पैसा देना होगा। अब लोग भी बैंक,मोबाइल वॉलेट और ऑनलाइन फास्ट टैग को मंगा रहे हैं। हालांकि देखने में आ रहा है कि माईफास्टैग एप पर रिचार्ज कराने पर लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं। इस बारे में लोग सोशल मीडिया से लेकर गूगल प्ले स्टोर पर शिकायत कर रहे हैं, लेकिन कहीं से भी उनको अपनी परेशानी का हल नहीं मिल रहा है।
हालांकि इस टैग को खरीदने और कार पर लगाने के बाद रिचार्ज करने के नाम पर एक बड़ा घोटाला हो रहा है। सरकारी कंपनी आईएचएमसीएल द्वारा शुरू गए मोबाइल एप पर रिचार्ज कराने के लिए ग्राहकों के बैंक खाते से पैसा तो कट जाता है, लेकिन आगे इसके बारे में कुछ पता नहीं चलता है। लोगों को फास्ट टैग खाते में पड़े बैलेंस और किसी तरह का स्टेटमेंट के बारे में भी जानकारी नहीं मिल रही है।
ग्राहक जब परेशान होकर के फास्ट टैग एप के टोल फ्री नंबर 1033 पर कॉल करते हैं, तो वहां पर मौजूद ग्राहक सेवा अधिकारी सिर्फ यह कह देता है कि गाड़ी का नंबर रजिस्टर्ड नहीं है, इसलिए वो गाड़ी में रिचार्ज की गई राशि के बारे में किसी तरह की कोई जानकारी नहीं दे सकते हैं। हालांकि संबंधित बैंक में बात करने पर पता चलता है, कि खाते से रिचार्ज करने की राशि फास्ट टैग को रिचार्ज करने के नाम पर कट चुकी है।