भारत में टेलीफोन उपभोक्ताओं की संख्या में इजाफा हुआ है। यह अप्रैल के अंत में 1,203.84 मिलियन से बढ़कर मई 2025 के अंत में 1,207.08 मिलियन हो गई। इसमें 0.27 प्रतिशत की मासिक वृद्धि हुई है। संचार मंत्रालय ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। आंकड़ों के अनुसार मई महीने के दौरान उपभोक्ताओं की कुल संख्या में 3.24 मिलियन का उछाल आया।
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शहरी और ग्रामीण टेलीफोन उपभोक्ताओं में अंतर
शहरी टेलीफोन उपभोक्ताओं की संख्या अप्रैल 2025 के अंत में 667.19 मिलियन से बढ़कर मई 2025 के अंत में 669.69 मिलियन हो गई। इसी अवधि के दौरान ग्रामीण टेलीफोन उपभोक्ताओं की संख्या भी 536.65 मिलयन से बढ़कर 537.39 मिलियन हो गई। मई 2025 के दौरान शहर टेलीफोन उपभोक्ताओं में 0.37 प्रतिशत की मासिक वृद्धि हुई। वहीं, ग्रामीण इलाकों में 0.14 प्रतिशत की मासिक वृद्धि हुई।
समग्र टेली -घनत्व बढ़कर 85.36% हुई
भारत में समग्र टेली -घनत्व अप्रैल 2025 के अंत में 85.19 प्रतिशत से बढ़कर मई 2025 के अंत में 85.36 प्रतिशत हो गई। शहरी दूरसंचार घनत्व अप्रैल के अंत में 131.46 प्रतिशत से बढ़कर मई के अंत में 131.76 प्रतिशत हो जाएगा। वहीं, इसी अवधि के दौरान ग्रामीण दूरसंचार घनत्व भी 59.26 से बढ़कर 59.33 प्रतिशत हो गई। समग्र टेली -घनत्व, किसी क्षेत्र में प्रति 100 व्यक्तियों पर टेलीफोन कनेक्शन की संख्या को दर्शाता है।
दिल्ली में अधिकतम दूरसंचार घनत्व 274.29% रहा
मई 2025 के अंत में कुल उपभोक्ताओं में शहरी और ग्रामिण उपभोक्ताओं की हिस्सेदारी क्रमश: 55.48 प्रतिशत और 44.52 प्रतिशत थी। मई 2025 के अंत में दिल्ली सेवा क्षेत्र में अधिकतम दूरसंचार घनत्व 274.29 प्रतिशत था और बिहार सेवा क्षेत्र में न्यूनतम दूरसंचार घनत्व 57.57 प्रतिशत था। दूरसंचार घनत्व का मतलब है प्रति 100 व्यक्तियों पर उपलब्ध दूरसंचार कनेक्शन की संख्या।
14.03 मिलियन उपभोक्ताओं ने ऑपरेटर परिवर्तन की इच्छा जताई
मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (एमएनपी) की बात करें तो मई 2025 में 14.03 मिलियन उपभोक्ताओं ने ऑपरेटर परिवर्तन की इच्छा जताई। मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (एमएनपी) एक ऐसी सुविधा है जो आपको अपना मोबाइल नंबर बदले बिना एक ऑपरेटर से दूसरे ऑपरेटर पर स्विच करने की अनुमति देती है। जुलाई 2015 से देश में अंतर-सेवा क्षेत्र एमएमपी लागू किया गया, जिससे मोबाइल उपभोक्ताओं को एक सेवा क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जाने पर भी अपना मोबाइल नंबर बरकरार रखने की सुविधा मिली। भारत में मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (एमएनपी) को हरियाणा सेवा क्षेत्र में नवंबर 2010 में और देश के शेष भागों में जनवरी 2011 में लागू किया गया।