नोटबंदी के बाद फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (एफएमसीजी) सेक्टर पर सबसे बड़ा नकरात्मक असर पड़ा था। शहरी क्षेत्रों पर इसका जहां दोगुना असर पड़ा, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में यह काफी कम रहा है।
बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान टूथपेस्ट, साबुन और नूडल्स की बिक्री में काफी कमी देखी गई वहीं चाय की बिक्री पर सबसे कम असर पड़ेगा।
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नूडल्स की बिक्री में देखी गई 33 फीसदी की कमी
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नोटबंदी के दो माह के समय में सबसे बुरा असर नूडल्स की बिक्री पर देखने को मिला। इस दौरान पूरे देश में इसकी मांग में 33.23 फीसदी की गिरावट देखने को मिली।
इसके अलावा साबुन और टूथपेस्ट की मांग में 16.17 व 18.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। यह आंकड़ा केवल शहरी क्षेत्रों का है और ग्रामीण इलाकों का आंकड़ा अभी आना बाकी है।
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बजट से है एफएमसीजी सेक्टर को काफी उम्मीदें
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- फोटो : अमर उजाला
नोटबंदी के बाद कम बिक्री से घबराए एफएमसीजी सेक्टर को उम्मीद है कि बजट में वित्त मंत्री इस सेक्टर के लिए कुछ अच्छा करेंगे। गोदरेज कंज्यूमर प्रॉडक्ट के एमडी विवेक गंभीर ने कहा कि हमें उम्मीद है कि सरकार लोगों के हाथों में ज्यादा से ज्यादा पैसा पहुंचाएगी, जिससे उपभोक्ता वस्तुओं की डिमांड में इजाफा हो।
बाजार के जानकारों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ता वस्तुओं की डिमांड घटना काफी चिंता का विषय है। ऐसा इसलिए क्योंकि शहरी क्षेत्र में रहने वाले लोग कैशलेस ट्रांजेक्शन आसानी से कर सकते थे।
इन कंपनियों की डिमांड मे देखी गई सबसे ज्यादा कमी
एक न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, नोटबंदी का सबसे नकरात्मक असर हिंदुस्तान यूनिलीवर और ज्योति लैबोरेटरी पर देखा गया। इन दोनों कंपनियों के प्रॉडक्ट्स इस दौरान सबसे कम बिके। इस दौरान कंपनियों के तीसरी तिमाही की सेल्स सबसे कम भी दर्ज की गई। प्रॉक्टर एंड गैम्बल की सेल्स में तीसरी तिमाही में सबसे ज्यादा कमी देखी गई।