नोटबंदी, रेरा और जीएसटी पड़े भारी
गौरतलब है कि नवंबर, 2016 में नोटबंदी, मई, 2017 में रेरा की पेशकश और फिर जुलाई, 2017 में जीएसटी के लागू होने से रियल्टी क्षेत्र को सबसे तगड़ा झटका लगा। माना जाता है कि कालेधन को रियल एस्टेट क्षेत्र में व्यापक स्तर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है। इस क्षेत्र के लिए यह तिहरा झटका खासा भारी पड़ा था। तब से अब तक यह क्षेत्र उबरने के लिए जूझ रहा है। एनबीएफसी क्षेत्र में तरलता के संकट की भी इसमें खासी भूमिका रही है।
नए सुधारों का एलान जल्द
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार मजबूत जनादेश का इस्तेमाल करते हुए एक बार फिर नए सुधारों का एलान करेगी। ये सुधार ऐसे होंगे, जो राज्यसभा में कम समर्थन के चलते सरकार पिछले कार्यकाल में नाकाम रही थी। गौरतलब है कि कई विश्लेषक भूमि और श्रम सहित कई सुधार जल्द से जल्द लागू करने की मांग कर रहे हैं। दर्जनों कंपनियों के चीन छोड़ने और वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों में विनिर्माण शुरू करने के संबंध में उन्होंने कहा, ‘सरकार ने संभावित कंपनियों की सूची बनाई है और उनसे बातचीत भी की है।’
एनएसई प्रमुख ने की कर कटौती की वकालत
मुंबई। एनएसई प्रमुख विक्रम लिमये ने शेयर बाजार से जुड़े करों में कटौती की वकालत की है। उन्होंने कहा कि पूंजी बाजार में होने वाले लेनदेनों पर लगने वाले प्रतिभूति लेनदेन कर, पूंजीगत लाभ कर, स्टैम्प ड्यूटी से प्रतिस्पर्धी बाजारों की तुलना में भारत को नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि कई प्रकार के करों से घरेलू बाजार की प्रतिस्पर्धी क्षमता कम हो रही है। उन्होंने सरकार से निवेश प्रवाह में बढ़ोतरी के लिए करों में कमी की मांग की।