देश में 5जी नेटवर्क के लिए उपभोक्ताओं को और इंतजार करना पड़ेगा। दूरसंचार विभाग (डॉट) ने अक्तूबर तक हर हाल में स्पेक्ट्रम नीलामी की समयसीमा तय की है लेकिन इसमें 5जी फ्रीक्वेंसी को शामिल नहीं किया गया है।
सूत्रों का कहना है कि वोडा-आइडिया और भारती एयरटेल के कई लाइसेंस की अवधि समाप्त होने वाली है। इन कंपनियों को अपनी दूरसंचार सेवाएं जारी रखने के लिए लाइसेंस का नवीनीकरण कराना अनिवार्य है, जिसके लिए उन्हें स्पेक्ट्रम नीलामी प्रक्रिया में बोली लगानी ही होगी।
इन दिक्कतों को देखते हुए ही दूरसंचार विभाग ने बिना 5जी स्पेक्ट्रम के ही नीलामी प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है। विभाग अक्तूबर तक 8 हजार मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम नीलाम करने की तैयारी में है। इसमें 700 मेगाहर्ट्ज, 800 मेगाहर्ट्ज, 900 मेगाहर्ट्ज, 1800 मेगाहर्ट्ज, 2100 मेगाहर्ट्ज, 2300 मेगाहर्ट्ज और 2500 मेगाहर्ट्ज के बैंड शामिल हैं।
डिजिटल संचार आयोग (डीसीसी) के नीलामी नियमों के तहत सफल बोलीदाताओं को 1 गीगाहर्ट्ज तक के स्पेक्ट्रम के लिए तय राशि की 25 फीसदी अग्रिम भुगतान करना होगा। वहीं, 1 गीगाहर्ट्ज से अधिक के स्पेक्ट्रम के लिए तय राशि का 50 फीसदी अग्रिम तौर पर जमा कराना होगा।
शेष राशि को 16 वर्षों के इंस्टॉलमेंट में बांट दिया जाएगा, जिसमें दो साल तक किसी भी भुगतान से छूट मिलेगी। तीसरे साल से बोलीदाता को सालाना भुगतान करना होगा। इससे पहले 5जी स्पेक्ट्रम के लिए डीसीसी के तय मूल्य पर दूरसंचार कंपनियों ने नाराजगी जताई थी। उनका कहना था कि प्रति मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम के लिए 492 करोड़ की राशि बहुत ज्यादा है और नीलामी में भाग लेने से इनकार कर दिया था।