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देश में एक समान कीमतों के लिए स्वर्ण बोर्ड बनाए सरकारः नवीन माथुर

Sat, 25 Jan 2020 04:37 AM IST
संजीव कुमार झा बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बजट 2020 - फोटो : अमर उजाला
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कमोडिटी बाजार आम बजट, 2020-21 से सोने के बाजार के नियमन के लिए स्वर्ण बोर्ड बनाने की आस लगाए हुए हैं। आम भारतीयों में सोने की खरीदारी को लेकर खासा आकर्षण रहता है,  लेकिन इसकी कीमत तय करने में एकरूपता का अभाव होने से देश के हर शहर में इसकी अलग-अलग कीमत होती है। वहीं इस क्षेत्र के विशेषज्ञ कमोडिटी बाजार को और बेहतर बनाने के लिए मंडी कर में छूट की मांग कर रहे हैं।

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कमोडिटी विश्लेषक एवं आनंद राठी समूह के निदेशक नवीन माथुर ने कहा कि भारत में सोने की हाजिर कीमत विभिन्न ज्वैलर्स एसोसिएशन द्वारा तय की जाती है। इसलिए अलग-अलग शहरों में सोने की कीमत में विभिन्नता तो होती ही है, साथ ही बड़े शहरों के भी अलग-अलग इलाकों में सोने की कीमत में अंतर होता है।

इस समय वैल्यू चेन में कीमत और गुणवत्ता को सुनिश्चित करने का कोई तंत्र नहीं है। इसलिए सरकार बजट के जरिये एक स्वर्ण बोर्ड बनाने की घोषणा करे, ताकि घरेलू बाजार में इसकी कीमतों की एकरूपता हो साथ ही यह क्षेत्र ज्यादा पारदर्शी बन सके।
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माथुर का कहना है कि पिछले बजट में सोने पर आयात शुल्क 10 फीसदी से बढ़ाकर 12.5 फीसदी कर दिया गया था। इससे रत्न एवं आभूषण क्षेत्र के लिए दिक्कतें होने के साथ ही सोने की तस्करी में भी इजाफा हुआ है। इसलिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारणम इस बजट में सोने पर आयात शुल्क घटाकर चार से छह फीसदी तक सीमित करना चाहिए। इससे सोने की तस्करी पर तो लगाम लगेगी और रत्न एवं आभूषणों का निर्यात भी बढ़ेगा।

एग्री कमोडिटी का बाजार बेहतर बनाने के लिए सरकार से किसानों की उपज की खरीद को आसान बनाने की आशा है। उनका कहना है कि पिछले दो बजट में सरकार की घोषणाओं के मूल में कृषि रहा है। सरकार ने उन सभी मसलों को हल किया है, जिससे किसान परेशान हैं। इसलिए यह उम्मीद की जा रही है कि इस बजट में कुछ ऐसे किसानों के फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने तथा फसलों की खरीद  की व्यवस्था बेहतर करने के उपाय होंगे।

मंडी शुल्क में हो कमी

नेशनल कमोडिटी एंड डेरीवेटिव्स एक्सचेंज (एनसीडीईएक्स) ने कहा कि किसानों की आय को दोगुना करने के लिए मंडी कर में छूट दी जानी चाहिए। ऐसा करने से किसानों के उत्पादों की सामूहिक बिक्री को प्रोत्साहन मिलेगा और उनकी प्रतिस्पर्धआ क्षमता में भी इजाफा होगा।

उनका कहना है कि प्रोसेस्ड एग्री कमोडिटीज पर लगाया गया कमोडिटी लेनदेन कर (सीटीटी) ने बाजार में सक्रिय खिलाड़ियों की लागत को बढ़ा दिया है। सरकार को एक बार फिर से सीटीटी नीति पर विचार करना चाहिए। ताकि प्रभावी लागत कम कर बड़े हेजर्स और ट्रेडर्स की भागीदारी को आसान बनाया जा सके।
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खपत बढ़ाने के लिए घटाया जाए आयकर: सर्वे

कर परामर्श कंपनी केपीएमजी के सर्वे के मुताबिक, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आयकर छूट सीमा मौजूदा 2.5 लाख रुपए सालाना से आगे बढ़ा सकती हैं। सर्वे में ज्यादातर लोगों ने उम्मीद जताई कि बजट में सरकार आयकर छूट सीमा मौजूदा 2.5 लाख रुपए सालाना से आगे बढ़ा सकती हैं।

वित्त मंत्री ने चालू वित्त वर्ष के लिए करदाताओं की पांच लाख रुपए तक की आय को करमुक्त किया हुआ है।तमाम छूट और रियायतों के बाद यदि कर योग्य आय पांच लाख रुपए से कम रहती है तो कोई कर देय नहीं होगा। हालांकि, जहां तक कर स्लैब का मुद्दा है, उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया। व्यक्तिगत आयकर स्लैब में 2.5 लाख से पांच लाख रुपये तक की आय पर पांच प्रतिशत की दर से कर देय है।

वहीं पांच लाख से 10 लाख तक 20 प्रतिशत और 10 लाख रुपये से अधिक के लिए 30 प्रतिशत की दर से आयकर लागू है। सर्वे में शामिल लोगों में से ज्यादातर का यह भी मानना है कि सरकार बजट में मानक कटौती बढ़ाएगी तथा होम लोन के मामले में और प्रोत्साहन दे सकती है।
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