सह-संस्थापकों और निवेशकों के दबाव के आगे झुकते हुए इन्फोसिस ने पूर्व सीईओ और भारत में आधार योजना के शिल्पकार नंदन नीलेकणि को अपना नया चेयरमैन नियुक्त किया है।
वह आर शेषासयी का स्थान लेंगे। रवि वेंकटेशन ने भी कंपनी के को-चेयरमैन का पद छोड़ दिया है। हालांकि वह कंपनी में स्वतंत्र निदेशक के तौर पर सेवाएं देते रहेंगे। गत सप्ताह विशाल सिक्का ने सीईओ का पद छोड़ दिया था लेकिन उन्हें उत्तराधिकारी की नियुक्ति होने तक वाइस चेयरमैन बनाया गया था।
अब वह भी तत्काल प्रभाव से बोर्ड से हट गए हैं। कंपनी की बोर्ड की बैठक के बाद जारी बयान में ये जानकारियां दी गई हैं। बोर्ड ने मंथन के बाद नारायण मूर्ति के नेतृत्व वाले संस्थापक समूह की मुख्य मांग को पूरा कर दिया है।
उनकी मांग थी कि देश की दूसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर सर्विस कंपनी चीजें दुरुस्त की जाएं। इस बीच कंपनी के दो स्वतंत्र निदेशकों जेफरी एस लेहमन और जॉन इचेमेंडी ने भी कंपनी के बोर्ड से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। गत सप्ताह विशाल सिक्का ने संस्थापकों पर बदनाम करने का आरोप लगाते हुए इन्फोसिस के एमडी और सीईओ के पद से इस्तीफा दे दिया था।
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नीलेकणि चाहते थे ये 4 बड़े बदलाव
रिपोर्ट के मुताबिक, नीलेकणि ने इन्फोसिस में वापसी के लिए कुछ नियम तय किए हैं, जिनका साफ इशारा है कि वो आने से पहले सबकुछ सही हो जाए। निलेकनी एक तय समय के लिए ही कंपनी में आएंगे।
सिक्का के इस्तीफे से कंपनी के निवेशकों, कस्टमर और कर्मचारियों का जो भरोसा टूटा है, उसे वापस लाना नीलेकणि की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इसके अलावा नए सीईओ के लिए सही व्यक्ति को चुनना और उसे ज्यादा ताकत देना भी निलेकनी की जिम्मेदारियों में शामिल है।
नीलेकणि चाहते थे कि वो नॉन एक्जिक्यूटिव चेयरमैन के पद पर आए। इसके लिए कंपनी के वर्तमान चेयरमैन आर शेषासयी और को चेयरमैन रवि वेंकटेशन को भी अपने पद से इस्तीफा देना होगा।
मूर्ति पर सिक्का के इस्तीफा देने का आरोप लगाने वाले पूरे इन्फोसिस बोर्ड से इस्तीफा मांगा जा रहा है। इसके लिए विदेशी और देशी संस्थागत निवेशक सिक्का के जाने के बाद से मांग कर रहे हैं।