दिल्ली से मुंबई जाने के लिए अभी जो सड़क मार्ग है उससे करीब 22 घंटे का समय लगता है। जबकि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे बन जाने पर यह समय घटकर 12 घंटे रह जाएगा, दोनों महानगरों के बीच की दूरी भी करीब 220 किलोमीटर घट जाएगी।
यह एक्सप्रेस-वे एक अलग रास्ता होगा, जो गुजरा, मध्यप्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र और राजस्थान के पिछड़े और दूर-दराज के कई आदिवासी इलाकों से होकर गुजरेगा। इसे तीन साल में बनाकर तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसकी अनुमानित लागत एक लाख करोड़ रुपये है।
'मझोले उद्योगों का आकार होगा दोगुना, फिर बदलेगी परिभाषा'
सरकार मझोले उद्योगों में निवेश बढ़ाने के लिए उसके आकार को दोगुना करने की तैयारी में है। इसके लिए मझोले उद्योगों की परिभाषा को फिर से बदलकर निवेश सीमा 50 करोड़ और टर्नओवर 200 करोड़ किया जाएगा। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले सप्ताह ही एमएसएमई क्षेत्र की परिभाषा बदलने का एलान किया था।
केंद्रीय एमएसएमई मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को कहा कि मझोले उद्योगों की परिभाषा को दोबारा संशोधित करने के लिए सरकार जल्द आदेश जारी करेगी। पिछले सप्ताह किए गए संशोधन के तहत 1 करोड़ तक निवेश और 5 करोड़ तक टर्नओवर वाली कंपनियों को सूक्ष्म, जबकि 10 करोड़ निवेश और 50 करोड़ टर्नओवर वाली कंपनियों को लघु उद्योग का दर्जा दिया गया है।
मझोले उद्योगों के लिए यह सीमा निवेश पर 20 करोड़ और टर्नओवर 100 करोड़ रखा गया है। गडकरी ने कहा कि हमने फैसला किया है कि मझोले उद्योगों का निवेश दायरा 20 करोड़ से बढ़ाकर 50 करोड़ और टर्नओवर 100 करोड़ से बढ़ाकर 200 करोड़ रुपये कर दिया जाए। इसके लिए जल्द आदेश जारी किया जाएगा।
गडकरी ने कहा, हमारा मानना है कि मझोले उद्योगों की परिभाषा निवेश और टर्नओवर के बजाए दोनों में से किसी एक पर आधारित होनी चाहिए। इतना ही नहीं, इस बात पर भी विचार किया जा रहा है कि मझोले उद्योगों की टर्नओवर सीमा 250 करोड़ कर दी जाए। इस पर एमएसएमई सचिव से बातचीत भी चल रही है।
हमारी कोशिश निर्यात में एमएसएमई क्षेत्र की भागीदारी को 48 से बढ़ाकर 60 फीसदी और जीडीपी में 29 से 50 फीसदी करने की है। यह क्षेत्र वर्तमान में 11 करोड़ रोजगार दे रहा है। इसे वैश्विक मानक तक पहुंचाकर 5 करोड़ रोजगार और पैदा करने की कोशिश है।
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को ट्वीट कर बताया कि सरकारी बैंकों ने 1 मार्च से 15 मई तक एमएसएमई, कृषि और खुदरा क्षेत्र को 6.45 लाख करोड़ रुपये के कर्ज बांटे हैं। इस दौरान 54.86 लाख खातों के लिए कर्ज स्वीकृत किया गया है। इसमेें 50 हजार करोड़ का कर्ज महज एक सप्ताह के भीतर दिया गया है।
वित्तमंत्री ने कहा, बैंकों ने 1.03 लाख करोड़ रुपये आपात कर्ज के रूप में दिए हैं, जो 20 मार्च के बाद बांटा गया है। इसके अलावा 65,879 करोड़ की राशि कार्यशील पूंजी के तौर पर दी गई, जो मौजूदा कोष के 10 फीसदी के बराबर देने की घोषणा की गई थी।