सरकार ने चेक बाउंस होने की दशा में चेक जारी करने वाले को जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स (संशोधन) विधेयक, 2017 को सोमवार को लोकसभा में ध्वनिमत से पारित कर दिया।
वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ल ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि अदालत में मुकदमा चलने पर पीड़ित पक्ष को नुकसान ना हो, इसलिए 20 फीसदी अंतरिम राशि का 60 दिन के भीतर भुगतान किये जाने की अनिवार्यता होगी।
अदालत को चेक जारी करने वाले पर जुर्माना लगाने का अधिकार दिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि चेक बाउंस होने पर सजा की व्यवस्था है, लेकिन इस तरह के मामलों में अपील करने का प्रावधान होने के कारण लंबित मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
इससे चेक की विश्वसनीयता कम हो रही है और असुविधाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि इस संशोधन से पीड़ित पक्ष को त्वरित न्याय मिल सकेगा व चेक की विश्वसनीयता और कारोबारी सुगमता बढ़ेगी।