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बजट 2018 में वित्त मंत्री जेटली इन 5 चीजों पर करेंगे फोकस

Thu, 04 Jan 2018 03:46 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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अरुण जेटली
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केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली 1 फरवरी 2018 को बजट पेश करेंगे। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार का यह आखिरी पूर्ण बजट होगा। इसके अलावा, 1 जुलाई 2017 से वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद भी यह पहला बजट होगा। 
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अब मोदी सरकार कस्टम ड्यूटी को छोड़कर खुद से अप्रत्यक्ष टैक्स दरों में बदलाव नहीं कर सकती। इसके लिए उसे जीएसटी काउंसिल की इजाजत लेनी पड़ेगी। 

वित्त मंत्री जेटली ने नवंबर में एक मीडिया समारोह में कहा था, 'केंद्रीय बजट का मुख्य ध्यान बुनियादी ढांचे और ग्रामीण क्षेत्रों पर खर्च होगा।'
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कई विश्लेषकों का कहना है कि बुनियादी ढांचे पर खर्च करने से निवेश को फिर से जीवित करने में मदद मिलेगी। ग्रामीण क्षेत्रों पर अतिरिक्त ध्यान देने से ग्रामीणों के लंबे समय से बने हुए संकट दूर करने में मदद मिलेगी। 

उम्मीद जताई जा रही है कि मोदी सरकार बजट में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के उपायों की घोषणा करेगी।

आगामी बजट की संभावित रूपरेखा 

1.ग्रामीण क्षेत्रों में खर्च पर ध्यान 
राज्य विधानसभा चुनावों से पहले देश के ग्रामीण इलाकों में राजनीतिक समर्थन को बढ़ाने के लिए मोदी सरकार बजट में खेत और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए धन आवंटन बढ़ा सकती है। वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पिछले महीने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा था, 'अगले बजट में किसानों, ग्रामीण क्षेत्र में नौकरियों और आधारभूत संरचना पर ध्यान दिया जाएगा। साथ ही वित्तीय राह में सावधानियां बरतने की सभी कोशिशें की जाएंगी। 

साल 2018 और 2019 की शुरुआत में आठ राज्यों में विधानसभा चुनाव होंगे, जिसके बाद 2019 में आम चुनाव होना है।

घटती नौकरियों पर चिंता, रोजगार सृजन पर जोर

प्रतीकात्मक तस्वीर
2. रोजगार पैदा करना 
मोदी सरकार एक राष्ट्रीय रोजगार नीति का खुलासा कर सकती है, जिसमें हर उद्योग में गुणवत्ता वाली नौकरियां पैदा करने के लिए एक विस्तृत खाका होगा। आगामी केंद्रीय बजट 2018 में इस नीति के ऐलान की संभावना है। 

श्रम मंत्रालय के तहत श्रम ब्यूरो द्वारा किए गए त्रैमासिक औद्योगिक सर्वेक्षण के मुताबिक पिछले छह साल की तुलना में साल 2015 में सबसे कम 1 लाख 35 हजार नौकरियां पैदा हुई। वहीं साल 2014 में 4 लाख 21 हजार नौकरियां और 2013 में 4 लाख 19 हजार नौकरियां पैदा हुई थी।

3. बुनियादी ढांचे पर खर्च 
वित्त मंत्री जेटली पहले ही बता चुके हैं कि आगामी केंद्रीय बजट में सरकार बुनियादी ढांचे पर खर्च को बढ़ावा देगी और आर्थिक विकास में मुख्य भूमिका निभाएगी। 

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने अक्टूबर में कहा था कि भारत को वित्त वर्ष 2018 और 2022 के दौरान स्थायी तौर पर अपने बुनियादी ढांचे के निर्माण करने के लिए करीब 50 लाख करोड़ रुपये खर्च करने की जरूरत है।

मोदी सरकार पहले ही ऐलान कर चुकी है कि वह 2022 तक राजमार्गों के 83,000 किलोमीटर से अधिक निर्माण करने के लिए 7 लाख करोड़ रुपये खर्च करेगी। 
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टैक्स दर में बदलाव संभव

अरुण जेटली - फोटो : ANI
4. टैक्स दर में बढ़ोतरी 
इस बजट में खर्च के लिए लोगों की आय बढ़ाने और व्यक्तिगत चिंताओं का ख्याल रखा जा सकता है। जानकारों का कहना है कि इस बजट में टैक्स दरों में मामूली बदलाव संभव है। 

अर्थशास्त्रियों ने भारतीय उद्योग को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कॉरपोरेट टैक्स दर में कटौती करने के लिए वित्त मंत्री जेटली से अपील की है। 

वित्त मंत्रालय ने हाल ही में एक नया प्रत्यक्ष कर कोड तैयार करने के लिए एक टास्क फोर्स बनाया था, जो कि दुनिया की सबसे अच्छे व्यवहारिक तरीकों और देश की आर्थिक जरूरतों को ध्यान में रखकर काम करेगा। 

5. बैंक पुनर्पूंजीकरण 
मोदी सरकार पहले ही 2.11 लाख करोड़ रुपये के बैंक पुनर्पूंजीकरण की बड़ी योजना का ऐलान कर चुकी है, जिनमें से 76,000 करोड़ रुपये बजटीय आवंटन और बाजार में बढ़ोतरी से आएंगे।

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति के सदस्य रथिन रॉय ने उम्मीद जताई थी कि 2018 का केंद्रीय बजट 'लोकलुभावन' नहीं होगा और खर्च की गुणवत्ता में सुधार के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाएगा।
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