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मोदी सरकार में घटा इन्वेस्टमेंट, क्रेडिट एजेसियों ने भी घटाई साख

Fri, 27 Jan 2017 05:00 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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मोदी सरकार के 2.5 साल के कार्यकाल में पहली बार ऐसा होने जा रहा है कि कंपनियों का अपनी तरफ से इन्वेस्टमेंट घट गया है और क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने भी भारत की रेटिंग को पहले के स्तर से नीचे कर दिया है। इससे आगामी बजट इस सरकार का सबसे मुश्किलों से भरा रहेगा। 
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नोटबंदी से पड़ा है कंपनियों पर काफी असर

समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, नोटबंदी को 3 महीने से ऊपर का समय गुजर गया है, लेकिन इससे सरकार की चुनौतियां काफी बढ़ गई हैं।  इससे आम लोग तो प्रभावित हुए, साथ ही उद्योगों पर भी काफी नकरात्मक असर पड़ा है।

इस बार के बजट में उद्योगों को रफ्तार देने के लिए कदम उठाने पड़ेंगे। अगर मोदी औक वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसके लिए कोई घोषणा नहीं की तो देश की इकनॉमी पर इसका काफी असर पड़ने की संभावना है। 
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क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने भी घटा दी है रेटिंग

विश्व की प्रमुख क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां जैसे की फिच, एसएंडपी ग्लोबल, मूडी ने भारत की साख को काफी नीचे कर दिया है। इसके साथ ही रिजर्व बैंक ने भी जीडीपी के अनुमान को 7.6 फीसदी से घटाकर के 6.8 फीसदी कर दिया है। केवल नोमुरा ने कहा है कि नोटबंदी से इकनॉमी पर इतना असर नहीं पड़ा है। 
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बजट डेफिसिएट को कम करना है बड़ी चुनौती

- फोटो : ANI
जेटली की सबसे बड़ी चिंता फिस्कल डेफिसिएट को कम करने की है। अभी इसको 3 फीसदी तक कम करना जरुरी है, लेकिन जेटली इसको 3.3 फीसदी तक बढ़ा सकने की घोषणा कर सकते हैं। लेकिन नोटबंदी के टैक्स कलेक्शन में कमी होने से इसके पूरा होने की उम्मीद काफी कम है।

इकनॉमिक एक्सपर्ट और रेटिंग एजेंसी क्रेडिट सूसे के एमडी नीलकंठ मिश्रा ने कहा कि सरकार के पास बहुत ही कम संसाधन बचे हुए हैं, जिससे अर्थव्यवस्था में तेजी आ सके। नोटबंदी के बाद जो हालात बने है उनके मई तक बने रहने की आशंका है।
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