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साक्षात्कार: इस साल दोहरे अंकों में होगी निर्यात वृद्धि दर, इसी तरह बनी रहेगी गति

Mon, 22 Apr 2019 06:04 AM IST
गौरव द्विवेदी शिशिर चौरसिया, अमर उजाला, नई दिल्ली
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फियो के अध्यक्ष गणेश कुमार गुप्ता (फाइल फोटो)
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वित्त वर्ष 2018-19 में भारत का निर्यात 331 अरब डॉलर के सर्वाधिक स्तर पर रहा है, जो पिछले वर्ष से 9.06 फीसदी अधिक है। अग्रणी वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में सुस्ती रहने और वैश्विक कारोबार धीमा होने के बावजूद केंद्र की सहायक नीतियों से निर्यात बढ़ा है। निर्यातकों को इसी तरह से प्रोत्साहन मिलता रहा, तो चालू वित्त वर्ष में निर्यात 12-15 फीसदी बढ़ेगा। निर्यात बढ़ाने की रणनीति और कदमों पर अमर उजाला के शिशिर चौरसिया ने निर्यातकों के शीर्ष संगठन फियो के अध्यक्ष गणेश कुमार गुप्ता से बातचीत की। पेश है अंश :

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-हमने सरकार से निर्यातकों को जीएसटी में छूट देने की मांग की है। नियमों का सही पालन न होने से अटक जाता है जीएसटी रिफंड।

प्रश्न- चालू वित्त वर्ष में भी इसी तरह की गति बनी रहेगी?
उत्तर- अनुमान है कि 2019-20 में हमारा निर्यात 12-15 फीसदी बढ़ेगा, अगर सरकार हमारा थोड़ा सा सहयोग करे। निर्यातक अभी कई विपरीत परिस्थितियों से जूझ रहे है, इसके बावजूद वह दुनिया के अन्य देशों से प्रतिस्पर्धा करते हुए काम कर रहे हैं। इसलिए हमें सरकार के सहयोग की जरूरत है।

प्रश्न- बीते वित्त वर्ष में भारत ने रिकार्ड 331 अरब डॉलर का निर्यात किया है। कैसे हासिल हुआ यह आंकड़ा?
उत्तर- बीते साल के दौरान कई विकसित देशों की अर्थव्यवस्था में वैसी मांग नहीं निकली जैसी कि आमतौर पर निकलती है, जिससे वैश्विक कारोबार की गति धीमी रही। तब भी भारत का मर्चेंडाइज निर्यात 331 अरब डॉलर रहा। हमने इलेक्ट्रॉनिक सामानों के निर्यात, प्लास्टिक और लिनोलियम के उत्पादों, पेट्रो पदार्थों, इंजीनियरिंग सामानों, कार्बनिक और अकार्बनिक रसायनों, औषधि, सूती वस्त्र, धागे, हैंडलूम पर बने कपड़ों आदि के क्षेत्र में काफी बढ़िया किया। हमने एक रणनीति बनाकर काम किया और परिणाम सामने है। 2013-14 में 314.4 अरब डॉलर का निर्यात हुआ था। वहीं, 2017-18 में 303.5 अरब डॉलर का निर्यात हुआ था।
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प्रश्न- इस साल किस क्षेत्र पर ज्यादा जोर रहेगा?
उत्तर- पिछले साल की तरह इस साल भी हमें दोहरी रणनीति बनानी होगी। एक तरफ फार्मास्यूटिकल्स, बायो टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में निर्यात बढ़ाना होगा, क्योंकि इन क्षेत्रों का वैल्यू रियलाइजेशन बेहतर होता है। दूसरी तरफ हमें कपड़ा, परिधान, इंजीनियरिंग सामानों तथा हस्तशिल्प का निर्यात बढ़ाने पर भी जोर लगाना होगा क्योंकि इनमें रोजगार के अधिक अवसर निकलते हैं।

प्रश्न- इस समय निर्यातकों की सबसे बड़ी परेशानी क्या है?
उत्तर- अभी निर्यातकों की सबसे बड़ी परेशानी वित्त पोषण है। इस साल का एक्सपोर्ट क्रेडिट आंकड़ा तो अभी तक नहीं आया है, लेकिन पिछले साल यह 26.4 फीसदी घटा था। 2018-19 के दौरान जून में तो यह 42.7 फीसदी के उच्च स्तर पर पहुंच गया था। यहां एक्सपोर्ट क्रेडिट को प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग में रखा गया है, लेकिन प्रक्रिया जटिल होने से निर्यातकों को समय पर उचित ऋण ही नहीं मिल पाता है। अगर सरकार भारतीय रिजर्व बैंक और अन्य बैंकों से बात कर निर्यातकों को समय पर ऋण दिलवाये, तो निर्यातक बहुत अच्छा करेंगे। अभी रिजर्व बैंक ने दो बार में रेपो दर में आधा फीसदी की कटौती की है, लेकिन बैंकों के ब्याज दर में इतनी कमी नहीं हुई है। यदि ऐसा हो तो निर्यातकों की लागत काफी कम हो जाए।

प्रश्न- पिछले साल आपने जीएसटी रिफंड का मसला जोर-शोर से उठाया था, अभी क्या स्थिति है?
उत्तर- निर्यातकों को जीएसटी रिफंड में पिछले साल राहत मिली थी, लेकिन बीते मार्च से फिर हालत खराब होने लगी है। अभी निर्यातकों का करीब 10 हजार करोड़ रुपये का जीएसटी रिफंड अटका हुआ है। यदि जीएसटी रिफंड समय पर मिल जाए, तो उन्हें इसके लिए भी बैंक से लोन नहीं लेना पड़े। हमारे अनुसार, निर्यातकों पर जीएसटी लगना ही नहीं चाहिए। वैसे भी निर्यात पर तो कोई कर लगाया नहीं जाता। लेकिन नियम यह है कि निर्यातक सामान भेजते वक्त जीएसटी चुका दे और माल के डिस्पैच होते ही रिफंड ले ले। लेकिन नियम का सही पालन नहीं होने से निर्यातकों का जीएसटी रिफंड अटक जाता है। इसलिए हमने सरकार से निर्यातकों को इससे छूट ही देने की मांग की है।

प्रश्न- पिछले साल ई-कामर्स कंपनियों से निर्यात को अमेजन जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों से समझौता हुआ था। उसका प्रदर्शन कैसा रहा?
उत्तर- ई-कामर्स कंपनियों से निर्यात का काफी उत्साहजनक परिणाम दिखा है। हमारे कुल निर्यात में ई-कामर्स कंपनियों से होने वाला निर्यात डेढ़ फीसदी तक पहुंच गया है। हालांकि, इसमें अभी हम चीन से काफी पीछे हैं। वहां के कुल निर्यात में ई-कामर्स कंपनियों की हिस्सेदारी 10 फीसदी है। लेकिन हम वहां भी पहुंचेंगे। इससे फायदा यह है कि दूर दराज के इलाके में स्वरोजगार करने वाले या छोटे कारोबारी भी अपना सामान विदेश में बेच सकते हैं। अभी इसमें थोड़ी बहुत दिक्कत है। कई कारणों से सीमा शुल्क विभाग शिपमेंट रोक देता है, जिससे निर्यातक को तो परेशानी होती ही है, साथ ही भारत की छवि भी विदेशों में खराब होती है। इसलिए हम सीमा शुल्क विभाग के अधिकारियों के साथ बैठकर रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं। 

इस साल निर्यात में दो अंकों में हासिल होगी विकास दर

वित्त वर्ष 2018-19 केदौरान भारत का निर्यात 331 अरब डॉलर के बराबर रहा है जो कि अभी तक का सर्वाधिक स्तर है। यह पिछले वर्ष के मुकाबले 9.06 फीसदी ज्यादा है। हालांकि निर्यात का यह आंकड़ा तब हासिल हुआ है, जबकि दुनिया भर की अग्रणी अर्थव्यवस्था में सुस्ती का माहौल था और वैश्विक कारोबार की गति धीमी हो गई थी। तब भी भारत ने ऐसा कमाल दिखाया, जिसकेलिए केन्द्र सरकार की सहायक नीतियां काफी हद तक प्रोत्साहक का काम किया है। इसी से उत्साहित निर्यातक कहते हैं कि यदि इसी तरह से उन्हें सरकार की तरफ से प्रोत्साहन मिलता रहा तो चालू वित्त्त वर्ष केदौरान निर्यात में 12 से 15 फीसदी की बढ़ोतरी आराम से हो सकती है। निर्यात बढ़ाने के लिए क्या रणनीति होनी चाहिए और सरकार को क्या करना चाहिए, इस मसले पर अमर उजाला केशिशिर चौरसिया ने निर्यातकों के शीर्ष संगठन फियो के अध्यक्ष गणेश कुमार गुप्ता से लंबी बातचीत की। पेश है इस बातचीत के संपादित अंश:-

प्रश्न- बीते वित्त्त वर्ष केदौरान भारत ने रिकार्ड 331 अरब डॉलर का निर्यात किया है जो कि अब तक का सर्वाधिक है। कैसे हासिल हुआ यह आंकडा?
उत्तर- हमने ऐसा कैसे किया, इस पर कुछ बोलने से पहले मैं बताना चाहूंगा कि बीता साल दुनिया भर में निर्यातक समुदाय केलिए सामान्य वर्ष नहीं था। उस दौरान कई विकसित देशों में अर्थव्यवस्था में वैसी मांग नहीं निकली जैसी कि आमतौर पर निकलती है। इसी वजह से वैश्विक कारोबार की गति धीमी हो गई। तब भी भारत का मर्केंडाइज निर्यात 331 अरब डॉलर रहा। इस दौरान हमने इलेक्ट्रोनिक सामानों केनिर्यात, प्लास्टिक और लिनोलियम के उत्पादों, पेट्रो पदार्थों, इंजीनियरिंग सामानों, कार्बनिक और अकार्बनिक रसायनों, औषधि एवं इससे जुड़े पदार्थों, सूती वस्त्र, धागे और इससे बने परिधानों, हैंडलूम पर बने कपड़ों आदि के क्षेत्र में हमने काफी बढ़िया किया। एक रणनीति बना कर काम किया और परिणाम सामने है। आप देखिये कि अभी तक सबसे ज्यादा निर्यात का रिकार्ड वर्ष 2013-14 में बना है। तब भी 314.4 अरब डॉलर का निर्यात हुआ था। एक साल पहले, मतलब 2017-18 में 303.5 अरब डॉलर का निर्यात हुआ था जबकि इस वर्ष यह बढ़ कर 330 अरब डॉलर से भी ऊपर चला गया।

प्रश्न- चालू वित्त वर्ष में भी इसी तरह की गति बनी रहेगी?
उत्तर- बिल्कुल बनी रहेगी बल्कि इससे भी ज्यादा होगी। हमारा मानना है कि चालू वित्त वर्ष केदौरान हम निर्यात में 12 से 15 फीसदी की बढ़ोतरी आसानी से हासिल कर लेंगे, यदि सरकार हमें थोड़ा सा सहयोग करें। आप देखिए कि निर्यातक इस समय कई बिपरीत परिस्थितियों से जूझ रहे है, इसके बावजूद वह दुनिया भर के अन्य देशों से प्रतिस्पर्धा करते हुए काम कर  रहा है। हम तो चाहते हैं कि सरकार सिर्फ हमें थोड़ा सा सहयोग करें।

प्रश्न- इस साल किस क्षेत्र पर ज्यादा जोर रहेगा?
उत्तर- हमें पिछले साल की तरह इस साल भी दोहरी रणनीति बनानी होगी। एक तरफ फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र में, बायो टेकभनोलोजी क्षेत्र में और इलेक्ट्रोनिक्स क्षेत्र में निर्यात बढ़ाना होगा क्योकि इन क्षेत्रों वैल्यू रियलाइजेशन बेहतर होता है। दूसरी तरफ हमें कपड़ा, परिधान, इंजीनियरिंग सामानों तथा हस्तशिल्प का निर्यात बढ़ाने के लिए ज्यादा जोर लगाना होगा क्योंकि इन क्षेत्रों में रोजगार के अवसर ज्यादा निकलते हैं।

प्रश्न- इस समय निर्यातकों की सबसे बड़ी परेशानी क्या है?
उत्तर- इस समय निर्यातकों की सबसे बड़ी परेशानी उनका वित्त पोषण है। इस तथ्य से तो आप भी भली भांति परिचित होंगे कि एक्सपोर्ट क्रेडिट में लगातार कमी हो रही है। इस साल का तो अभी तक आंकड़ा नहीं आया है, लेकिन पिछले साल एक्सपोर्ट क्रेडिट में 26.4 फीसदी की कमी हुई थी। बीते वित्त्त वर्ष केदौरान जून में तो यह 42.7 फीसदी के उच्च स्तर पर पहुंच गया था। परेशानी की बात यह है कि यहां एक्सपोर्ट क्रेडिट को प्रायोरिटी सेक्टर लैंडिंग में रखा गया है, लेकिन इसकी प्रक्रिया इतनी जटिल बना दी गई है कि निर्यातकों को समय पर उचित मात्रा में ऋण ही नहीं मिल पाता है। मेरा कहना है कि सरकार रिजर्व बैंक और बैंकों से बात कर निर्यातकों को समय पर ऋण दिलवायें तो निर्यातक बहुत अच्छा करेंगे। अभी देखिये ना, रिजर्व बैंक ने दो बार में रेपो दर में आधा फीसदी की कटौती की है, लेकिन बैंकों के ब्यज दर में इतनी कमी नहीं हुई है। यदि ऐसा हो तो निर्यातकों की लागत काफी कम हो जाए।

प्रश्न- पिछले साल आपने जीएसटी रिफंड का मसला जोर-शोर से उठाया था, अभी क्या स्थिति है?
उत्तर- निर्यातकों को जीएसटी रिफंड में पिछले साल राहत मिली थी, लेकिन बीते मार्च से फिर हालत खराब होने लगी है। हमारा आकलन है कि इस समय निर्यातकों का करीब 10 हजार करोड़ रुपये का जीएसटी रिफंड अटका हुआ है। यदि जीएसटी रिफंड समय पर मिल जाए तो उन्हें इसके लिए भी बैंक से लोन नहीं लेना पड़े। हमारा तो कहना है कि निर्यातकों पर जीएसटी लगना ही नहीं चाहिए। वैसे भी निर्यात पर तो कोई कर लगाया नहीं जाता। लेकिन इस तरह से नियम बना दिया गया है कि निर्यातक सामान भेजते वक्त जीएसटी चुका दे और माल के डिस्पैच होते ही उसका रिफंड मिल जाए। लेकिन नियम का सही सही पालन नहीं होने से निर्यातकों का जीएसटी रिफंड अटक जाता है। इसलिए हमने सरकार से मांग की है कि निर्यातकों को इससे छूट ही दे जाए, क्योंकि अंतत: तो वह रकम वापस ही मिल जाती है।
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प्रश्न- पिछले साल आपने ई कामर्स कंपनियों केजरिये निर्यात के लिए ई बे और आमेजन जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों से समझौता किया था। कैसा रहा प्रदर्शन उसका?
उत्तर- ई कामर्स कंपनियों के जरिये निर्यात का काफी उत्साहजनक परिणाम दिखा है। देखिए ना, अभी तो हमने इसमें कदम ही बढ़ाया है, लेकिन इसी बीच हमारे कुल निर्यात में ई कामर्स कंपनियों के जरिये किये जाने वाले निर्यात का हिस्सा डेढ़ फीसदी तक पहुंच गया है। हालांकि चीन के मुकाबले हम इसमें अभी काफी पीछे हैं। वहां के कुल निर्यात में ई कामर्स कंपनियों के जरिये होने वाले निर्यात की हिस्सेदारी करीब 10 फीसदी की है। लेकिन हम वहां भी पहुंचेंगे। इससे फायदा यह है कि दूर दराज के इलाके में काम कर रहे स्वरोजगार करने वाले या छोटे कारोबारी भी अपना सामान विदेश में बेच सकते हैं। अभी इसमें थोड़ी बहुत दिक्कत है, जैसे कि किसी तकनीकी वजह से या किसी अन्य कारण से सीमा शुल्क विभाग वाले शिपमेंट रोक देते हैं। इससे निर्यातक को तो परेशानी होती ही है, भारत की छवि भी विदेशों में खराब होती है। इसलिए हम इस दिशा में सीमा शुल्क विभाग के अधिकारियों के साथ बैठ कर कुछ रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं।

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