छोटी बचत योजनाओं पर फैसला वापस लेने को भले ही ‘अप्रैल फूल’ से जोड़ा जा रहा हो, पर अगर वित्त मंत्रालय संजीदगी से फैसला लेता, तो यू-टर्न से बचा जा सकता था। विशेषज्ञ मानते हैं, छोटी बचतों पर ब्याज दर तय करते समय सरकार अर्थव्यवस्था में तेजी और छोटे निवेशकों के हितों की सुरक्षा देने के असमंजस में रहती है।
बाजार आधारित दरों से तुलना करें तो सरकारी योजनाओं पर ब्याज दर ज्यादा है, जो सामूहिक रूप से दरें कम करने में बाधक है। छोटी योजनाओं पर ब्याज दरें तय करने का निश्चित फार्मूला होता है, जो सरकार की सुरक्षा और दूसरे मानकों पर आधारित होता है।