वैश्विक स्तर पर अमेरिका जैसे देशों में वीजा नियमों में हुई सख्ती के बाद भारत सरकार ने एशिया-प्रशांत (एपैक) क्षेत्र के देशों को बताया है कि भारतीय कंपनियों ने 9 देशों में 1.71 लाख से ज्यादा स्थानीय नौकरियां पैदा की हैं, जिससे भारतीयों को कम वर्किंग परमिट की जरूरत होगी।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक ये मामला रीजनल कॉम्प्रिहैंसिव इकॉनमिक पार्टनरशिप (RCEP) एग्रीमेंट के बाद प्रकाश में आया है। इसमें चीन, जापान, साउथ कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और आसियान देश शामिल हैं।
भारतीय प्रोफेशनल्स, जिनमें सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स शामिल हैं को वर्क वीजा देने और निवेश के नियमों में नरमी बरतने को लेकर अनिच्छुक हैं। वहीं भारतीय सरकार इन देशों को इस बात से लुभाना चाहती है कि भारतीय प्रोफेशनल्स इन देशों की आर्थिक तरक्की में ही भागीदार नहीं होंगे बल्कि इन्फोसिस, विप्रो, टीसीएस जैसी कंपनियां भी हजारों नौकरियां पैदा करेंगेी।
हाल के सालों में वीजा प्रतिबंध बढ़ गया है। भारत सरकार ने सिंगापुर सरकार पर द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संधि में भारतीय पेशेवरों को अनुमति देने की अपनी प्रतिबद्धता से पलटने का आरोप लगाया है। ऑस्ट्रेलिया ने भी वीजा नियमों को कड़ा कर दिया है ताकि वे वीजा के आधार पर विदेशियों की जांच कर सकें। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने समकक्ष माल्कॉम टर्नबुल के समक्ष इस मुद्दे को उठाया है।