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भारतीय अर्थव्यवस्था: खुदरा मुद्रास्फीति फरवरी में बढ़कर 5.03 प्रतिशत पर पहुंची

Fri, 12 Mar 2021 07:16 PM IST
योगेश साहू पीटीआई, नई दिल्ली।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पेक्सेल्स
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देश की अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़े सरकार की ओर से जारी किए गए हैं। इनके अनुसार खुदरा मुद्रास्फीति फरवरी माह में बढ़कर 5.03 प्रतिशत पर पहुंच गई है। खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ने से मुद्रास्फीति बढ़ी है। सरकार ने शुक्रवार को जारी आंकड़ों में इसकी जानकारी दी है।

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एक माह पहले जनवरी में उपभोक्ता मूलय सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति 4.06 प्रतिशत पर थी। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक सीपीआई के खाद्य समूह में फरवरी माह के दौरान मुलय वृद्धि 3.87 प्रतिशत रही जो कि एक माह पहले 1.89 प्रतिशत पर थी।

ईंधन और प्रकाश समूह में मुद्रास्फीति फरवरी माह में 3.53 प्रतिशत पर जनवरी के 3.87 प्रतिशत के मुकाबले मामूली कम रही। रिजर्व बैंक अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा के दौरान मुख्यतौर पर खुदरा मुद्रास्फीति पर ही गौर करता है।

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मौद्रिक नीति की समीक्षा करेगा रिजर्व बैंक

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रा स्फीति अक्तूबर 2016 से मार्च 2020 की अवधि में औसतन 3.9 प्रतिशत रही जो चार प्रतिशत के लक्ष्य से कम है। इसे रिजर्व बैंक अपनी उपलब्धि मान सकता है। एक रिपोर्ट में यह जानकारी देते हुए कहा गया है कि पांच साल बाद रिजर्व बैंक एक बार फिर अपनी मौद्रिक नीति व्यवस्था की समीक्षा करने जा रहा है।

रिजर्व बैंक के गवर्नर की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति 31 मार्च तक नीतिगत ढांचे और मुद्रास्फीति लक्ष्य की समीक्षा करने की तैयारी में हैं। जून 2016 में रिजर्व बैंक को इस संबंध में पहली बार मुद्रास्फीति को दो प्रतिशत की घटबढ़ के साथ चार प्रतिशत पर स्थिर रखने का काम दिया गया था। उसके बाद यह पहली बार होगा जब रिजर्व बैंक इसकी समीक्षा करेगा।

वित्त वर्ष 2021-22 में मुद्रास्फीति 4.6 प्रतिशत रहेगी: गुप्ता

बैंक ऑफ अमेरिका (बोफा) सिक्युरिटीज ने रिजर्व बैंक के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि इस दौरान न केवल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रा स्फीति औसतन 3.9 प्रतिशत न केवल चार प्रतिशत के लक्ष्य के दायरे में रही बल्कि इस दौरान उसमें उतार-चढ़ाव भी घट कर 1.4 अंक के दायरे में रहा। ये आंकड़े अक्तूबर 2016 से मार्च 2020 की अवधि के हैं। इससे पहले 2012 से 2016 के दौरान मुद्रास्फीति में धट-बढ़ का दायरा 2.4 तक रहा था।

बैंक ऑफ अमेरिका सिक्युरिटीज के अर्थशास्त्री इंद्रनिल सेन गुप्ता और आस्थ गुडवानी ने एक नोट में शुक्रवार को कहा कि उनका मानना है कि अगले वित्त वर्ष 2021-22 में सीपीआई मुद्रास्फीति औसतन 4.6 प्रतिशत पर रहेगी जो कि चालू वित्त वर्ष 2020-21 के 6.2 प्रतिशत से कम होगी। इस प्रकार यह रिजर्व बैंक के मौजूदा तय दायरे 2 से 6 प्रतिशत के भीतर ही रहेगी।
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वित्तीय स्थिरता और वृद्धि पर पड़ेगा प्रभाव 

उनका मानना है कि फरवरी 2021 में सीपीआई का आंकड़ा 4.8 प्रतिशत रह सकता है जो कि जनवरी में 4.1 प्रतिशत पर था। यह वृद्धि प्रतिकूल तुलनात्मक आधार और बढ़ते खाद्य और ईंधन मुद्रास्फीति की वजह से हुई है।

नए मुद्रास्फीति लक्ष्य के बारे में उनका मानना है कि संशोधित रूपरेखा भी निचले स्तर पर दो प्रतिशत और उच्च स्तर पर 6 प्रतिशत के दायरे में बनी रहेगी। यह छह प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता है क्योंकि ऐसा होने से वित्तीय स्थिरता और वृद्धि पर प्रभाव पड़ सकता है।
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