अमेरिकी व्यापार विभाग के अधिकारी ने कहा, "अमेरिका के पास सबूत हैं कि चीन ऐसे अमेरिकी फर्म की तलाश में है जो उनके साथ पार्टनरशिप कर चीन के बाजार में उतर सके और फिर अमेरिका पर तकनीक भेजने का दबाव बनाया जा सके। अमेरिका को इस बात के भी सबूत मिले हैं कि चीन अमेरिका के महत्वपूर्ण उद्योगों में निवेश को नुकसान पहुंचा रहा है और साइबर अटैक भी करवाता है।"
ये सब बातें उस जांच से सामने आई हैं जिसके आदेश राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले साल अगस्त में दिए थे। व्यापार कानून के सेक्शन 301 के हिसाब से सरकार के पास अधिकार है कि वह उन देशों पर एकतरफा प्रतिबंध लगा सकती है जो व्यापार में गड़बड़ी कर रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के मुकाबले अपने व्यापार घाटे को लेकर कई बार आवाज उठाई है।
चीन ने क्या कहा?
गुरुवार को चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि वह भी इन नए शुल्कों का जवाब देने के लिए तैयार है। "चीन चुपचाप बैठकर अपने हक और हितों का नुकसान होते नहीं देखेगा और इनके बचाव के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।"
वॉल स्ट्रीट जरनल के मुताबिक चीन भी अमेरिका पर शुल्क लगाकर इसका जवाब देने की सोच रहा है। इसका मतलब है कि चीन अमेरिका के कृषि आयात पर भी शुल्क लगा सकता है। कृषि प्रधान राज्यों में डोनल्ड ट्रंप का वोट बेस है।