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खेती से करोड़ों की आमदनी हो तो भी नहीं लगेगा GST, अखबारों को भी कराना होगा रजिस्ट्रेशन

Fri, 07 Jul 2017 11:37 AM IST
amarujala.com- Presented By: अनंत पालीवाल
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खेत में उगी वस्तुओं के बेचने से किसी किसान को यदि साल में करोड़ों रुपये की भी आमदनी होती है तो भी उसे वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत पंजीकरण कराने या कर चुकाने की जरूरत नहीं होगी। यह स्पष्टीकरण केंद्रीय राजस्व सचिव हसमुख अढिया की तरफ से आया है।
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बृहस्पतिवार को यहां कारोबारियों, टैक्स प्रोफेशनलों एवं मीडिया से जुड़े लोगों के लिए अयोजित जीएसटी की मास्टर क्लास में अढिया ने बताया कि किसानों को अपने खेत से उगे किसी भी सामान को बेचने पर जीएसटी देय नहीं होगा। 

इसलिए किसानों की आमदनी चाहे साल में एक लाख रुपये हो, दस लाख रुपये हो, बीस लाख रुपये हो या 50 लाख रुपये हो या एक करोड़ रुपये क्यों नहीं हो, उन्हें जीएसटी नेटवर्क में पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने बताया कि जीएसटी में खेती से उगे सामान की बड़ी सरल परिभाषा तय की गई है, जो भी चीज खेत से उगा रहे हैं, उस पर टैक्स नहीं लगेगा।
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कई राज्यों में रजिस्ट्रेशन कब      
राजस्व सचिव ने बताया कि यदि कोई कारोबारी कई राज्यों में अपना सामान बेचते हैं तो उन्हें सिर्फ वहां पंजीकरण कराना होगा, जिस राज्य से सामान बेच रहे हैं। लेकिन यदि उनका दफ्तर यदि कई राज्यों में है और हर राज्य के पते पर बिलिंग हो रही है तो उन्हें उन हर राज्य में पंजीकरण कराना होग, जहां से बिलिंग हो रही है।
 
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अनिवार्य पंजीकरण किनको

जो कारोबारी रिवर्स चार्ज वसूल रहे हैं, जैसे ट्रांसपोर्टर। इनका वार्षिक टर्नओवर यदि साल में 20 लाख रुपये से कम भी है, तो भी उन्हें जीएसटी नेटवर्क में पंजीकरण कराना होगा। इसी तरह ईकॉमर्स के जरिए सामान बेचने वाले हर व्यापारी को जीएसटीएन नंबर लेना होगा।

ओला, उबर टैक्सी चालकों को नहीं लेना होगा जीएसटी नंबर
उन्होंने बताया कि यूं तो टैक्सी चलाने वाले रिवर्स चार्ज में आएंगे लेकिन उन्हें जीएसटी नंबर नहीं लेना होगा, बल्कि टैक्सी एग्रीगेटर कंपनी को जीएसटी नंबर लेना होगा और उन्हें ही टैक्स जमा कराना होगा।

अखबारों को लेना होगा जीएसटी नंबर
अढिया के मुताबिक ऐड स्पेस पर पांच फीसदी का जीएसटी है। इसलिए जिस अखबार को ऐड स्पेस बेचने से होने वाली आमदनी साल में 20 लाख रुपये से ज्यादा है, उसे जीएसटी नंबर लेना होगा।
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