भारतीय कंपनियों का कुल विदेशी ऋण जुलाई 2016 में 44 फीसदी घटकर 1.2 अरब डॉलर दर्ज किया गया, जो एक साल पहले समान अवधि में 2.14 अरब डॉलर था।
भारतीय रिजर्व बैंक के शुक्रवार को जारी आंकड़े के मुताबिक भारतीय कंपनियों ने 18.37 करोड़ डॉलर ऋण अप्रूवल मार्ग से लिए और 1.02 अरब डॉलर ऋण ऑटोमेटिक चैनल से लिए।
अप्रूवल मार्ग से ऋण लेने वालों में तिकोना डिजिटल नेटवर्क ने 17.1 करोड़ डॉलर पूंजीगत वस्तुओं के आयात के लिए और विजयवाड़ा टोलवे ने 1.107 करोड़ डॉलर सड़क संबंधी कार्यों के लिए जुटाए।
ऑटोमेटिक चैनल से ऋण लेने वाली प्रमुख कंपनियों में एचडीएफसी ने ऑन-लेंडिंग के लिए 44.638 करोड़ डॉलर, ग्लेनमार्क फार्माश्यूटिकल्स ने विदेशी अधिग्रहण के लिए 20 करोड़ डॉलर और अडाणी ट्रांसमीशन ने रुपये मूल्य में लिए गए ऋणों की रिफाइनेंसिंग के लिए 7.44 करोड़ डॉलर जुटाए।
ऑटोमेटिक चैनल से ऋण जुटाने वाली अन्य प्रमुख कंपनियों में बिड़ला कारपोरेशन ने पुराने ईसीबी के रिफाइनेंसिंग के लिए चार करोड़ डॉलर जुटाए और सीमेंस फाइनेंशियल सर्विसेज ने ऑन-लेंडिंग के लिए 3.72 करोड़ डॉलर जुटाए।