कोविड-19 महामारी के कारण बने चुनौतीपूर्ण कारोबारी माहौल के बीच वाहन डीलर अपनी संपत्तियों और श्रमबल को सुसंगत बनाने की कोशिश कर रहे हैं। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) ने बृहस्पतिवार को कहा, 'मौजूदा हालात में बड़े शहरों में डीलरशिप चलाना मुश्किल है क्योंकि यहां छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों के मुकाबले दबाव ज्यादा है। ऐसे में संभव है कि वाहन कंपनियां छोटे शहरों में ज्यादा डीलरशिप खोलेंगी।'
फाडा के अध्यक्ष विंकेश गुलाटी का कहना है कि डीलर छोटे शहरों की ओर रुख करने की तैयारी में हैं। वहां उन्हें अपेक्षाकृत कम किराया देना पड़ेगा। उन्होंने कहा, कारोबार को टिकाऊ बनाए रखने के लिए सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चर्स (सियाम) और वाहन कंपनियों से बात जारी है ताकि आगामी त्योहारी सीजन के दौरान डीलरों के पास वाहनों का बड़ा भंडार जमा नहीं हो। हम पिछले दो वर्षों जैसी स्थिति में फिर से नहीं पहुंचना चाहते हैं। इन दो साल के दौरान वाहनों का बड़ा भंडार जमा हो गया था। फाडा ने प्रेमॉनएशिया के साथ मिलकर मूल उपकरण विनिर्माताओं (ओईएम) के कोविड-19 के दौरान डीलर भागीदारों को दिए समर्थन पर जुलाई-अगस्त में सर्वे कराया था।
15 महीने से नकारात्मक थी वृद्धि
फाडा के मुताबिक, कोविड-19 महामारी के पहले से ही भारतीय वाहन उद्योग सुस्ती से जूझ रहा था। वास्तव में पिछले 15 महीने से हमारी वृद्धि नकारात्मक थी। इसके बाद कोरोना ने वाहन उद्योग और खासकर डीलरों को बड़ा झटका दिया। ऐसे संकट के दौर में कई ओईएम ने विभिन्न तरीकों से डीलरों की मदद की, जिस पर सर्वे कराया गया। लॉकडाउन के दौरान किया मोटर्स और टोयोटा किर्लोस्कर ने यात्री वाहन सेगमेंट में डीलरों की उम्मीदों को अन्य कंपनियों के मुकाबले बेहतर तरीके से पूरा किया।