सरकार ने चालू वित्त वर्ष से आयकर रिटर्न भरना अनिवार्य कर दिया है। अगर आपकी आय टीडीएस के दायरे में आती है तो रिटर्न दाखिल करना बेहद जरूरी है। साथ ही सभी व्यक्तिगत करदाताओं के लिए पैन रखना भी जरूरी हो गया है। इसका ध्यान नहीं रखने वालों पर टीडीएस का बोझ कैसे बढ़ेगा, पूरी जानकारी देती प्रमोद तिवारी की रिपोर्ट-
50,000 रुपये से अधिक टीडीएस कटौती तो करना होगा ज्यादा भुगतान, तो देना होगा 20 प्रतिशत से ज्यादा टीडीएस
अगर संबंधित करदाता ने टीडीएस चुकाने वाले को अपने पैन कार्ड की जानकारी नहीं दी है तो टीडीएस की दर 20 फीसदी से अधिक हो सकता है। नए नियम के तहत भुगतान कर्ता को भुगतान के समय टीडीएस काटने से पहले तीन बातों को प्रमाणित करना जरूरी है।
ऐसे समझ सकते हैं कटौती का गणित
मान लेते हैं कि कोई कंपनी पिछले दो वर्षों से किसी ग्राहक को 70 लाख रुपये का अनुबंध भुगतान कर रही है। इस पर कंपनी 1 प्रतिशत की दर से टैक्स (सालाना 70 हजार रुपये) काटेगी। अगर ग्राहक ने दोनों वर्षों में ही आईटीआर नहीं फाइल किया है और इसकी अंतिम तारीख भी निकल चुकी है तो ऐसे में कंपनी तीसरे साल में इसकी पुष्टि करने के बाद 5 प्रतिशत की दर से टैक्स काटेगी, जो 1 प्रतिशत के दोगुने 2 प्रतिशत से भी अधिक है। अब मान लें कि ग्राहक ने पैन की जानकारी भी नहीं दी हो तो टीडीएस 20 प्रतिशत की दर से देना होगा, जो 5 प्रतिशत व 2 प्रतिशत से ज्यादा है।
आय को ध्यान में रखकर उठाएं कदम
सभी करदाताओं को अपनी आय ध्यान में रखकर रिटर्न भरने के प्रति गंभीर रहना होगा। अगर आपकी आय पर टीडीएस काटा गया है तो रिटर्न भरने से बिल्कुल न चूकें। एक साल गलती से नहीं भरा तो दूसरे साल दोनों ही वर्षो का रिटर्न दाखिल कर दें। ऐसा नहीं किया तो दोगुने से भी ज्यादा टीडीएस का बोझ बढ़ जाएगा। -अतुल गर्ग, कर विशेषज्ञ