देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यम ने रविवार को देश की अर्थव्यवस्था को 50 खरब डॉलर की बनाने का फार्मूला सुझाया। उन्होंने कहा, यदि देश को 2024-25 तक ऐसी अर्थव्यवस्था बनना है तो उसे ग्लोबल साइज के ज्यादा बैंकों की आवश्यकता होगी।
सुब्रमण्यम ने इस बात पर दुख जताया कि भारत का महज एक ही बैंक 100 ग्लोबल बैंकों की सूची में शामिल है, जबकि उससे ज्यादा छोटे आकार की अर्थव्यवस्था वाले देशों के पास ऐसे ज्यादा बैंक हैं।
ग्लोबल टॉप-100 बैंकों की सूची में महज भारतीय स्टेट बैंक ही 55वें स्थान पर है, जबकि चीन के 18 बैंक और अमेरिका के 12 बैंक इस सूची में शामिल हैं। सुब्रमण्यम यहां बंधन बैंक की 5वीं सालगिरह के मौके पर आयोजित व्याख्यान में बोल रहे थे।
सुब्रमण्यम ने कहा, विश्व में भारत 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। इसलिए यदि भारतीय बैंकिंग सेक्टर अर्थव्यवस्था के आकार के अनुपात में हो तो भारत को दक्षिण कोरिया की जगह होना चाहिए, जिसके 6 बैंक ग्लोबल-100 में हैं। लेकिन इसके उलट भारत का केवल एक बैंक ही ग्लोबल सूची में है।
उन्होंने कहा, फिनलैंड, डेनमार्क, बेल्जियम, ऑस्ट्रिया और नार्वे आदि जैसे जिन देशों का आकार महज भारत के एक अंश के बराबर है, उनके भी ग्लोबल टॉप-100 सूची में कम से कम एक बैंक शामिल हैं। उन्होंने कहा, आप स्वीडन और सिंगापुर जैसे देशों को देखते हैं तो स्वीडन अपनी अर्थव्यवस्था के 1/6 आकार का है और सिंगापुर 1/8 आकार का, उनके 3 बैंक ग्लोबल टॉप 100 में हैं।
धोनी की कप्तानी का दिया उदाहरण
सुब्रमण्यम ने कैप्टन कूल के नाम से मशहूर और हाल ही में संन्यास लेने वाले क्रिकेटर एमएस धोनी का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, देश को विदेशी धरती पर कैसे जीतें, ये सिखाने वाले क्रिकेटर एमएस धोनी की तरह भारतीय बैंकिंग सिस्टम को भी ग्लोबल स्टेंडर्ड पर ऊंचा उठने की जरूरत है।