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माल्या पर चलेंगे यह मुकदमे, आसान नहीं 9000 करोड़ की देनदारी वसूलना

Tue, 18 Apr 2017 04:14 PM IST
amarujala.com, Presented By : अनंत पालीवाल
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विजय माल्या - फोटो : Getty
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भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या की लंदन पुलिस द्वारा गिरफ्तारी करने के बाद माल्या से 9000 करोड़ से अधिक की देनदारी को वसूलना मुख्य प्राथमिकता रहेगी।
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लंदन से प्रत्यपर्ण होने के बाद भारत आने पर माल्या के खिलाफ एसबीआई सहित 17 बैंकों  के कंर्सोशियम ने कोर्ट में पैसे वसूलने को लेकर के उन पर केस दायर कर रखा है। अब सीबीआई माल्या के प्रत्यपर्ण के लिए वेस्टमिनिस्टर कोर्ट में अपील करेगी।  

चलेगा मनी लॉन्ड्रिंग और लोन डिफॉल्ट का मामला

मार्च 2016 में विजय माल्या चुपचाप देश छोड़कर लंदन भाग गए थे। तब ऐसे देश छोड़ने पर मोदी सरकार की बहुत किरकिरी हुई थी। अब ब्रिटेन से प्रत्यपर्ण होने के बाद माल्या पर दो अहम मुकदमें चलेंगे, जिनमें पहला लोन डिफॉल्ट और दूसरा मनी लॉन्ड्रिंग का केस। अभी तक बैंक केवल 155 करोड़ की वसूली माल्या से कर पाएं हैं। इसके अलावा हाल ही में गोवा के किंगफिशर विला की नीलामी हो पाई थी, जिसके बाद 73 करोड़ रुपये और बैंकों के पास आए।       
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दिल्ली की इस अदालत में भी दर्ज है एक मुकदमा

व‌िजय माल्‍या
शराब कारोबारी विजय माल्या के खिलाफ दिल्ली की अदालत ने भी गत 12 अगस्त को खुला गैर जमानती वारंट जारी किया था। ये वारंट माल्या के खिलाफ विदेशी विनिमय अधिनियम (फेरा) उल्लंघन के मामले में जारी किया था। इसी मामले में अदालत ने माल्या को समन जारी कर पेश होने का निर्देश दिया था, लेकिन वह पेश नहीं हुआ। इसके बाद अदालत ने वारंट जारी किया। 

पटियाला हाउस स्थित सीएमएम सुमित दास ने प्रवर्तन निदेशालय के आग्रह पर बुधवार को माल्या के खिलाफ नए सिरे से गैर जमानती वारंट जारी कर दिया। ईडी ने कोर्ट को बताया कि चार नवंबर 2016 को जारी वारंट तामील नहीं हुआ है और उसमें समय लगेगा। इसलिए खुला गैर जमानती वारंट (ओपन एनबीडब्ल्यू) जारी किया जाए। क्योंकि उसकी तामील के लिए समय सीमा नहीं होती। 
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माल्या को भारत वापस लाना नहीं है आसान 

भारत के प्रत्यर्पण के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय की ओर से मंजूरी दिए जाने के बाद इस मामले को वेस्टमिन्स्टर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट भेज दिया गया है।

अगर कोर्ट इस मामले में भारत की ओर से पेश किए गए तथ्यों से संतुष्ट हुई तो माल्या के प्रत्यर्पण की अंतिम बाधा भी दूर हो जाएगी। विदेश मंत्रालय के अधिकारी गोपाल बागले ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि ब्रिटेन सरकार ने माल्या का प्रत्यर्पण संबंधी भारत की मांग को स्वीकार किए जाने की जानकारी दी है।

ब्रिटेन ने भारत को बताया है कि प्रत्यर्पण की मांग को विदेश मंत्रालय ने अपनी मंजूरी दे दी है। इसके बाद की प्रक्रिया के तहत मामले को वेस्टमिन्स्टर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट को भेज दिया गया है। गौरतलब है कि कर्ज चुकाने के बदले देश छोड़ कर चले जाने के बाद भारत ने ब्रिटेन  से माल्या के प्रत्यर्पण का अनुरोध किया था।

अब क्या है प्रक्रिया 
ब्रिटेन के प्रत्यर्पण के लिए राजी हो जाने के बावजूद भारत की राह इतनी भी आसान नहीं है। दरअसल अब वेस्टमिन्स्टर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट प्रत्यर्पण के लिए माल्या के खिलाफ वारंट जारी होने से पहले मामले की सुनवाई कर दोनों का पक्ष सुनेगा।

कोर्ट भारत के पक्ष और दस्तावेज से संतुष्ट होने के बाद ही माल्या के खिलाफ वारंट जारी करेगा। पहले भी कुछ मामलों में सरकार के राजी होने के बावजूद कोर्ट प्रत्यर्पण की अपील ठुकरा चुका है।
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