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GST: रोजमर्रा की 200 से ज्यादा चीजें सस्ती, सरकार को होगा 20 हजार करोड़ का नुकसान

Sat, 11 Nov 2017 09:40 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, गुवाहाटी
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मोदी सरकार ने आर्थिक सुस्ती के बीच आम जनता और व्यापारियों को बड़ी राहत देते हुए जीएसटी में अब तक के सबसे बड़े बदलाव के तहत च्यूइंग गम से चॉकलेट और सौंदर्य प्रसाधन से लेकर कलाई घड़ी तक 200 से ज्यादा चीजों पर टैक्स की दरें कम करने की घोषणा की है। 
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दैनिक उपयोग की 178 वस्तुओं पर 28 फीसदी के बजाय अब 18 फीसदी जीएसटी वसूला जाएगा। सरकार के इस कदम से पेंट और सीमेंट को छोड़कर घर बनाने की सभी वस्तुएं सस्ती हो गई हैं। 

इसके अलावा फाइव स्टार होटलों को छोड़कर सभी रेस्त्रां पर एक समान पांच फीसदी का टैक्स लिया जाएगा। शुक्रवार को जीएसटी परिषद की गुवाहाटी में हुई 23वीं बैठक में सर्वसम्मति से ये फैसले किए गए। अब 28 फीसदी के उच्चतम दर के दायरे में सिर्फ 50 लग्जरी वस्तुएं बच गई हैं। इस निर्णय से सरकार को सालाना 20 हजार करोड़ रुपये के राजस्व की चपत लगेगी।
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पढ़ें:  डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ाने के लिए सरकार का प्‍लान, ऑनलाइन पेमेंट से हटेगा GST

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने परिषद की बैठक के बाद उसके फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि 13 वस्तुओं पर टैक्स 18 से घटाकर 12 फीसदी, छह वस्तुओं पर 18 से घटाकर पांच फीसदी, छह वस्तुओं पर पांच से घटाकर शून्य और आठ वस्तुओं पर 12 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी कर दिया गया है। इस फैसले के बाद पेंट और सीमेंट को छोड़कर घर बनाने के सभी सामान सस्ते होंगे।

बाहर खाना होगा सस्ता

परिषद यह फैसला किया गया कि फाइव स्टार होटलों को छोड़कर बाकी सभी रेस्त्रां अब पांच फीसदी के स्लैब में आएंगे लेकिन उन्हें इनपुट क्रेडिट नहीं मिलेगा। वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि रेस्त्रां मालिक इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा उपभोक्ताओं को नहीं दे रहे थे। इसलिए, नई व्यवस्था लागू की गई है।

साढ़े सात हजार रुपये से ज्यादा किराए वाले होटलों में चल रहे रेस्त्रां पर 18 फीसदी का टैक्स लगेगा और उन्हें इनपुट क्रेडिट भी मिलेगा। इससे पहले गैर एसी रेस्त्रां पर 12 फीसदी और एसी रेस्त्रां पर 28 फीसदी का टैक्स था।

कंपोजिशन टर्नओवर डेढ़ करोड़
परिषद ने जीएसटी की कंपोजिशन स्कीम के तहत टर्नओवर की सीमा को एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर डेढ़ करोड़ रुपये करने का फैसला किया है। इससे छोटे व्यापारियों को काफी राहत मिलेगी। एक जुलाई को जब जीएसटी लागू किया गया था तो इस स्कीम में टर्नओवर की सीमा 75 लाख रुपये थी, जिसे अक्तूबर में बढ़ाकर एक करोड़ रुपये कर दिया गया था। 

सरकारों को नुकसान
पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने बताया कि जीएसटी लागू करने के तीन महीने बाद राजस्व वसूली में केंद्र सरकार को 60 हजार करोड़ और राज्य सरकारों को 30 हजार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।
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बिहार के उपमुख्यमंत्री ने की थी सिफारिश

बिहार के उपमुख्यमंत्री ने बताया कि फिटमेंट कमेटी ने 62 वस्तुओं को 28 फीसदी के स्लैब में रखने की सिफारिश की थी, लेकिन परिषद ने इसमें से भी 12 वस्तुओं को 18 फीसदी के दायरे में रखने का फैसला किया है।

जीएसटी की उच्चतम दर को 18 फीसदी पर रखने को लेकर आम सहमति बन चुकी है लेकिन इसे धीरे-धीरे लागू किया जाएगा क्योंकि इसकी वजह से सरकार के खजाने को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा।

उन्होंने बताया कि वाशिंग मशीन, एयरकंडीशनर, ऑटोमोबाइ, ऑटो कंपोनेंट, परफ्यूम और वैक्यूम क्लीनर पर पहले की तरह 28 फीसदी की दर लागू होगी। इसके अलावा पेंट और सीमेंट को भी इसी स्लैब में रखा गया है। 

मालूम हो कि लगभग डेढ़ दर्जन अप्रत्यक्ष करों की जगह एक जुलाई, 2017 से देश भर में लागू की गई जीएसटी प्रणाली की समीक्षा में इससे पहले 100 से ज्यादा चीजों की दरों में कमी की जा चुकी है और कंपोजिशन स्कीम की सीमा बढ़ाई जा चुकी है। जुलाई के बाद से लगभग हर महीने हुई परिषद की बैठक में जीएसटी की दुश्वारियों को दूर करने की कोशिश की जा रही है।
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