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कारोबार सुगम बनाने के लिए गैरजरूरी नियम हटाएगी सरकार

Fri, 31 Jul 2020 06:08 AM IST
संजीव कुमार झा बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण(फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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सरकार देश में नया कारोबार शुरू करने के लिए अनुपालन का बोझ घटाने पर जोर दे रही है। इसके लिए गैरजरूरी नियमों को खत्म कर कारोबारी सुगमता बढ़ाई जाएगी। डीपीआईआईटी के सचिव ने  गुरुवार को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर कैबिनेट सचिव इसकी निगरानी कर रहे हैं। सीआईआई के कार्यक्रम में उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग के सचिव गुरुप्रसाद महापात्र ने कहा कि नया कारोबार शुरू करने के लिए अभी दर्जनों स्तर पर अनुमतियां लेनी पड़ती हैं।

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आर्थिक सर्वे 2020 में भारतीय रेस्तरां संगठन के हवाले से बताया गया है कि एक रेस्तरां खोलने के लिए दिल्ली पुलिस से लाइसेंस लेना है तो 45 दस्तावेजों की जरूरत होती है। जबकि नया हथियार खरीदने के लिए 19 व बड़ी पटाखा फैक्टरी लगाने को 12 दस्तावेजों की जरूरत है।

देश में अधिकतर कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती भारतीय प्रशासनिक तंत्र का जटिल ढांचा है। एक विनिर्माण इकाई को कुल 6,796 तरह के अनुपालन पूरे करने होते हैं। ये खर्चीला तो है ही समय भी बहुत लगता है।
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बढ़ रही कारोबारी सुगमता
विश्व बैंक की कारोबारी सुगमता सूची में पिछले साल भारत 14 पायदान चढ़कर 63वें नंबर पर पहुंच गया और सुधार करने वाले शीर्ष-10 देशों में शामिल रहा। 2014 में मोदी सरकार के आने के बाद से कारोबारी सुगमता रैंकिंग में भारत ने 79 स्थान का सुधार किया है।

हालांकि, अभी कई मोर्चे पर सुधार करना होगा। भारत में एक अनुबंध लागू करने में औसतन 1,445 दिन लगते हैं, जबकि चीन में 496 दिन और न्यूजीलैंड मेें 216 दिन लगते हैं। यहां टैक्स भुगतान में औसतन 250 घंटे जबकि चीन में 138 घंटे और न्यूजीलैंड में 140 घंटे लगते हैं।

उद्योगों के लिए बना रहे सिंगल विंडो सिस्टम : गोयल
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि उद्योगों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम बनाया जा रहा है। उन्होंने चिंता जताई कि बड़ी मात्रा में जमीन खाली पड़ी है लेकिन उद्योगों को नहीं मिल पा रही है। हम जल्द ही लैंड बैंक पोर्टल लांच करने वाले हैं, जहां दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर गूगल अर्थ के जरिये इसका निरीक्षण किया जा सकेगा।

5 लाख हेक्टेअर भूमि की पहचान हो चुकी है। छह राज्यों ने इसके आंकड़े भी उपलब्ध करा दिए हैं। उन्होंने निर्यातकों को भरोसा दिया है कि भारत से माल निर्यात योजना (एमईआईएस) के मुद्दों का जल्द समाधान किया जाएगा। 23 जुलाई से वाणिज्य मंत्रालय ने निर्यातकों का आवेदन लेना बंद कर दिया है।

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