कोरोना बीमारी के अर्थव्यवस्था और व्यवसायों पर पड़े नकारात्मक प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने एमएमएमई का दायरा बढ़ा दिया है। कोरोना से निपटने के लिए शुरू की गई तीन लाख करोड़ रुपये की इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम के तहत अब डॉक्टर, वकील और चार्टर्ड अकाउंटेट भी लोन ले सकते हैं।
इन पेशों से जुड़ा कोई भी व्यक्ति एमएसएमई की इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम के तहत बिना गारंटी के लोन ले सकता है। सरकार ने स्कीम में लोन की आउटस्टैंडिंग सीमा को भी बढ़ाकर दोगुना कर दिया है। कोरोना की वजह से व्यवसाय पर पड़े प्रभाव को कम करने के लिए व्यापारियों ने सरकार से राहत की मांग की थी।
इसके बाद सरकार ने मई में इन व्यापारियों को राहत देने के लिए इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम को घोषणा की थी। इस स्कीम के तहत एमएसएमई को कम ब्याज दर के साथ बिना गारंटी के तीन लाख करोड़ रुपये तक का लोन दिया जा सकता है। इसके अलावा ज्यादा कारोबारी इस स्कीम का फायदा उठा सकें, इसके लिए एमएसएमई की परिभाषा भी बदली गई, जो एक जुलाई से पूरे देश में लागू हो गई है।
शनिवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने कहा कि अब इस स्कीम के तहत कारोबारी मकसद के लिए व्यक्तिगत लोन भी दिया जा सकता है लेकिन लोन लेने से पहले आवेदक को सभी पात्रताएं पूरी करनी होंगी। वित्तीय सेवाओं के सचिव देबाशीष पांडा ने बताया कि अब इस योजना में डॉक्टर, वकील और सीए जैसे पेशे को भी शामिल किया जा रहा है।
पांडा ने बताया कि ज्यादा से ज्यादा कंपनियों को इसका लाभ पहुंचाने के लिए लोन आउटस्टैंडिंग का दायरा भी बढ़ाया गया है। जिन एमएमएमई कंपनियों पर 29 फरवरी तक 50 करोड़ का लोन आउटस्टैंडिंग है, वो भी इस स्कीम के तहत फायदा ले सकती हैं। स्कीम के तहत गारंटेड एमरजेंसी क्रेडिट लाइन को पांच करोड़ से बढ़ाकर दस करोड़ कर दिया गया है।
यही नहीं अब 250 करोड़ रुपये टर्नओवर वाली कंपनियों को भी इसका लाभ मिलेगा, हालांकि ये सीमा अबतक 100 करोड़ रुपये की थी। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 29 जुलाई तक बैंक और नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों ने 1.37 लाख करोड़ रुपये के लोन को मंजूरी दे दी है।
31 अक्तूबर तक इस स्कीम के तहत लोन के लिए आवेदन किया जा सकता है।