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मुद्रा लोन में बढ़ते एनपीए से घबराई सरकार, पात्रता में बदलाव की तैयारी

Fri, 08 Jun 2018 10:07 PM IST
हरेन्द्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मुद्रा लोन में बढ़ते एनपीए ने सरकार को परेशानी में डाल दिया है। जिसके बाद सरकार मुद्रा लोन की पात्रता में बदलाव की योजना बना रही है। सरकार ने एक प्रस्ताव तैयार किया है जिसके तहत कुशल श्रमिकों को ही मुद्रा लोन का लाभ मिलेगा। सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक मुद्रा लोन की पात्रता में बदलाव करके केवल उन्हीं लोगों को लोन का फायदा दिया जाए, जिनके पास स्किल ट्रेनिंग सर्टिफिकेट हो। 

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चार साल पूरे कर चुकी मोदी सरकार पहले ही नए रोजगार पैदा न होने और बेरोजगारी बढ़ने जैसे आरोपों का सामना कर रही है, वहीं मुद्रा लोन में बढ़ रहे एनपीए ने भी सरकार की नींद उड़ा दी है। यहां तक कि कौशल विकास योजना के तहत स्किल ट्रेनिंग लेने के बाद भी लाखों युवा बेरोजगार हैं। 

कुशल श्रमिकों को ही मिले लोन

सरकार ने एक तीर से दो निशाने साधते हुए मुद्रा लोन का एनपीए कम करने और स्किल ट्रेनिंग पा चुके युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए एक नया प्रस्ताव पेश किया है। सरकार की योजना है कि इस नए प्रस्ताव से कुशल श्रमिकों को लोन प्रदान करके देश में रोजगार की स्थिति में सुधार किया जा सकता है। कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक अगर किसी स्किल वर्कर को जॉब नहीं मिलती है, तो वह अपना बिजनेस सेटअप खड़ा कर सकता है। इससे न केवल वह अपना बिजनेस खड़ा कर पाएगा, बल्कि वह दूसरों को भी रोजगार मुहैया करने में मदद करेगा। 
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मुद्रा लोन में बढ़ा एनपीए

गौरतलब है कि हालिया आंकड़ों के मुताबिक मुद्रा लोन का एनपीए अब 14 हजार 358 करोड़ का हो चुका है, यानी इस लोन को चुकाए जाने की संभावना बहुत कम है। एनपीए को रोकने में लगे वित्त मंत्रालय और बैंकों के सामने रणनीति को लेकर चुनौती है। इस मामले में बैंकों ने सरकार और आरबीआई को साफ तौर पर बता दिया है कि मुद्रा लोन में एनपीए और बढ़ सकता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मुद्रा स्कीम में अब तक 12 करोड़ 78 लाख लोगों को लोन दिया जा चुका है। ये लोन शिशु, किशोर और तरुण, तीन अलग अलग कैटिगरी के तहत दिए गए। शिशु कैटिगरी में 50 हजार रुपये तक, किशोर में 5 लाख रुपये तक और तरुण में 5 लाख से 10 लाख रुपये तक के लोन दिए जाते हैं। 

वहीं किशोर कैटिगरी में अब तक लोन पाने वालों की संख्या सिर्फ 1.3 फीसदी है, यानी कि 12 करोड़ 78 लाख लोगों में से सिर्फ 17 लाख 57 हजार लोगों को ही मोटी रकम का लोन मिला है। इसका मतलब है कि मुद्रा लोन लेकर कारोबार शुरू करने वालों की संख्या काफी कम है। मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक कुशल श्रमिकों को मुद्रा लोन का फायदा देने की योजना पर वित्त मंत्रालय से बातचीत हो चुकी है। सरकार यह पहल वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के साथ मिल करेगी। 
 

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स्कीम से बढ़ा रोजगार

हाल ही में मुद्रा योजना के लाभार्थियों से बातचीत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि मुद्रा स्कीम से स्व-रोजगार बढ़ा है, जिससे दूसरों को भी रोजगार के मौके उपलब्ध हुए हैं। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने बताया था कि सरकार के आकड़ों के मुताबिक मुद्रा योजना के 12 करोड़ लाभार्थियों में से 28 फीसदी तकरीबन 3.25 करोड़ लोग पहली बार उद्यमी बने थे। वहीं 74 फीसदी तकरीबन 9 करोड़ लाभार्थी महिलाएं थीं और 55 फीसदी लाभार्थी एससी/एसटी और दूसरी पिछड़ी जातियों से थे। 

सरकार ने जुलाई 2015 में स्किल इंडिया मिशन के तहत प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना लॉन्च की थी। वहीं सरकार ने स्किल इंडिया मिशन को सुचारू रूप से चलाने के लिए अलग से नया मंत्रालय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय भी बनाया था। लेकिन मंत्रालय सरकार की कोशिशों पर खरा नहीं उतर पाया। इस योजना के तहत सरकार अभी तक 13 लाख युवाओं को ट्रेनिंग दे चुकी है, जिनमें से फरवरी, 2018 तक 9 लाख युवाओं को प्रमाणित किया जा चुका है। 
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