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लॉकडाउन के बाद सितंबर में सबसे ज्यादा 95,480 करोड़ जीएसटी वसूली, विनिर्माण में 8.5 साल की तेजी

Fri, 02 Oct 2020 05:26 AM IST
Jeet Kumar बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर
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कोरोना महामारी और अर्थव्यवस्था की चुनौतियों से जूझ रही सरकार के लिए आर्थिक मोर्चे पर राहत भरी खबर है। सितंबर में जीएसटी वसूली कोविड-19 पूर्व स्तर के करीब पहुंचकर 95,480 करोड़ रुपये रही। अप्रैल में लॉकडाउन के बाद यह सबसे ज्यादा जीएसटी संग्रह है। विनिर्माण क्षेत्र भी 56.8 पीएमआई के साथ 8.5 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया है।

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वित्त मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को बताया कि सितंबर में कुल 95,480 करोड़ रुपये जीएसटी संग्रह रहा। इसमें 17,741 करोड़ रुपये केंद्रीय जीएसटी और 23,131 करोड़ रुपये राज्यों की जीएसटी के रूप में मिले हैं। एकीकृत जीएसटी 47,484 करोड़ रुपये रहा, जिसमें 22,242 करोड़ उत्पादों के आयात से मिला है। सेस के रूप में 7,124 करोड़ रुपये वसूले गए।


सितंबर 2019 में 91,916 करोड़ की जीएसटी वसूली हुई थी, जो इस साल 4 फीसदी ज्यादा रही। आयात से वसूली भी पिछले साल की 102 फीसदी और घरेलू लेनदेन से वसूली 105 फीसदी पहुंच गई है। लॉकडाउन से पहले मार्च, 2020 में जीएसटी संग्रह 97,597 करोड़ रुपये था।
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आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि जीएसटी वसूली में आई तेजी से अर्थव्यवस्था में सुधार के व्यापक संकेत मिलते हैं। आगे त्योहारी सीजन में खपत और मांग और बढ़ेगी जिससे कर वसूली इजाफा होेने का अनुमान है। 

2020-21 में जीएसटी की चाल

महीना                वसूली (करोड़ रुपये में)

अप्रैल                     32,172
मई                         61,151
जून                        90,917
जुलाई                    87,422
अगस्त                    86,449

2012 के बाद विनिर्माण क्षेत्र का बेहतर प्रदर्शन
विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों में लगातार दूसरे महीने सुधार आया। सितंबर में विनिर्माण क्षेत्र का पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) 8.5 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान सूचकांक 56.8 रहा, जो अगस्त में 52 था। जनवरी, 2012 के बाद से विनिर्माण क्षेत्र का यह सबसे बेहतर प्रदर्शन है। आईएचएस मार्किट की अर्थशास्त्री और निदेकश पॉलियाना डि लीमा ने कहा कि भारत की विनिर्माण गतिविधियां सही दिशा में बढ़ रही हैं। लॉकडाउन में ढील के बाद कारखाने पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं और नए ऑर्डर भी मिले हैं। अप्रैल में पीएमआई 32 महीने के निचले स्तर पर चला गया था। 
रोजगार में सुधार की उम्मीद कम...लीमा ने कहा कि निर्यात भी सुधरा है, लेकिन उत्पादकों ने कर्मचारियों की संख्या घटाने के संकेत दिए हैं। यह लगातार छठा महीना है जब रोजगार में गिरावट आई है। इस मोर्चे पर अभी दिक्कते हैं और आगे भी जल्दी सुधार की उम्मीद नहीं दिख रही।

छह महीने बाद बढ़ी पेट्रोल की बिक्री, डीजल में भी तेजी
सितंबर में पेट्रोल की मांग पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 2 फीसदी बढ़कर 22 लाख टन रही। मार्च में लॉकडाउन के बाद से पेट्रोल में पहली बार तेजी आई है और कुल खपत कोविड-19 पूर्व स्तर पर पहुंच गई। सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों ने बृहस्पतिवार को बताया कि अगस्त के मुकाबले पेट्रोल की खपत 10.5 फीसदी बढ़ी है, जो 19 लाख टन थी। डीजल की खपत में भी तेजी आई, जो सितंबर में 48.4 लाख टन रही। सालाना आधार पर इसमें 7 फीसदी गिरावट है लेकिन अगस्त के मुकाबले 22 फीसदी उछाल दिखा है। भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के निदेशक (विपणन) अरुण कुमार सिंह ने कहा कि लोग आवाजाही के लिए निजी वाहनों को तरजीह दे रहे हैं, जिससे पेट्रोल की खपत बढ़ी है। डीजल की मांग अभी कमजोर है, क्योंकि स्कूल बंद हैं और सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल कम हो रहा है। अक्तूबर-नवंबर में ईंधन की खपत पूरी तरह सामान्य हो जाएगी।

बिजली खपत में भी 5.6 फीसदी उछाल 
औद्योगिक और वाणिज्यिक गतिविधियों में सुधार से सितंबर में बिजली खपत 5.6 फीसदी बढ़कर 113.54 अरब यूनिट पहुंच गई। फरवरी के बाद बिजली खपत में पहली बार उछाल दिखा है। पिछले साल के मुकाबले बिजली खपत 5 फीसदी से ज्यादा बढ़ी है। सितंबर, 2019 में कुल 107.51 अरब यूनिट बिजली खर्च हुई थी। अगर लॉकडाउन के बाद से तुलना करें तो पिछले साल के मुकाबले मार्च में 8.7 फीसदी, अप्रैल 23.2 फीसदी, मई में 14.9 फीसदी, जून में 10.9 फीसदी, जुलाई में 3.7 फीसदी और अगस्त में 1.7 फीसदी गिरावट आई थी। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि आर्थिक गतिविधियों में सुधार के साथ बिजली खपत में भी तेजी आ रही है। अक्तूबर से इसमें और इजाफा होने का अनुमान है।

वाहन बाजार ने बदला गियर, मारुति की बिक्री 31 फीसदी बढ़ी
करीब डेढ़ साल से सुस्त चाल में चल रही वाहन बिक्री ने भी सितंबर में गियर बदलकर रफ्तार पकड़ ली है। मारुति की बिक्री में पिछले साल के मुकाबले 31 फीसदी तेजी आई और सितंबर में कुल 1,60,442 गाड़ियां बेची। पिछले साल की समान अवधि में 1,22,640 वाहन बिके थे। मारुति सुजुकी इंडिया ने बताया कि घरेलू बाजार की बिक्री में 32.2 फीसदी उछाल आया और अल्टो, एस-प्रेसो जैसी छोटी गाड़ियों की बिक्री 35.7 फीसदी बढ़ी। सबसे ज्यादा 47.3 फीसदी की तेजी स्विफ्ट, सिलेरियो इग्निस, बलेनो जैसी कॉम्पैक्ट कार सेग्मेंट में रही। कंपनी का निर्यात भी सितंबर में 9 फीसदी बढ़ा है।

अन्य कंपनियों का मिलाजुला प्रदर्शन

कंपनी                 बिक्री

ह्यूंडई                4 फीसदी तेजी
महिंद्रा              17 फीसदी गिरावट
स्कोडा                7 फीसदी तेजी
टोयोटा                20 फीसदी गिरावट
होंडा कार्स            10 फीसदी तेजी

बाइक की बंपर बिक्री
होंडा मोटरसाइकिल स्कूटर इंडिया (एचएमएसआई) ने सितंबर में 5,26,865 बाइक बेची, जो पिछले साल की समान अवधि से 8.48 फीसदी ज्यादा है। बजाज ऑटो की बिक्री में भी 10 फीसदी तेजी आई और कुल 4,41,306 मोटरसाइकिलें बिकीं।

ट्रैक्टर में तेजी, वाणिज्यिक वाहन में गिरावट
कृषि गतिविधियों में तेजी और रबी का रकबा बीते साल से ज्यादा होने से ट्रैक्टर की मांग भी बढ़ी। एस्कॉर्ट ने सितंबर में 9.2 फीसदी ज्यादा ट्रैक्टर बेचे। हालांकि, वाणिज्यिक वाहनों में सुस्ती रही और आयशर मोटर्स की बिक्री 7.3 फीसदी घट गई।

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