सिटी गैस परियोजना में सरकार की महारत्न कंपनी गेल इंडिया लिमिटेड की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। इस समय गेल अपनी अनुषंगी इकाइयों और साझेदार कंपनियों के जरिए गैस वितरण में करीब 60 फीसदी हिस्सेदारी निभा रही है। इसे अगले कुछ साल में 75 फीसदी करने का लक्ष्य है। कंपनी की भविष्य की परियोजनाओं पर अमर उजाला के शिशिर चौरसिया ने गेल के सीएमडी बीसी त्रिपाठी से बातचीत की। पेश है अंश :
प्रश्न- सरकार ऊर्जा के मामले में भारत को गैस पर आधारित अर्थव्यवस्था बनाना चाहती है। इसमें गेल का क्या योगदान है?
उत्तर- भारत को गैस पर आधारित अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में गेल महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। वर्तमान में हमारी करीब 11,500 किलोमीटर की पाइपलाइन की परियोजना पूर्ण हो चुकी है। करीब 6,000 किलोमीटर की पाइपलाइन परियोजना पर काम चल रहा है। इस परियोजना का काम काफी तेजी से हो रहा है। कई परियोजनाएं पूर्ण होने की कगार पर हैं।
इससे देश के अधिकतर हिस्सों में हाई प्रेशर गैस की आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। इससे औद्योगिक, व्यावसायिक और घरेलू तीनों श्रेणी के ग्राहकों की आवश्यकता की पूर्ति हो सकेगी। इससे बिजलीघरों, लोहा इस्पात उद्योग और रासायनिक उर्वरक उद्योग को कोयले के बदले गैस पर शिफ्ट होने में मदद मिलेगी। इसके अलावा घरों में पाइप से आपूर्ति होने वाले गैस पीएनजी और मोटर वाहनों के लिए सीएनजी की आपूर्ति भी सुनिश्चित हो सकेगी।
प्रश्न- सिटी गैस परियोजनाओं में गेल की क्या भागीदारी है?
उत्तर- घरेलू गैस परियोजनाओं में हमारी स्थिति काफी बेहतर है। यदि हम अपनी, अपने अनुषंगी उपक्रमों और साझेदारी वाली परियोजनाओं को जोड़ दें तो इस समय करीब 60 फीसदी परियोजनाएं गेल से ही जुड़ी हैं। आने वाले समय में हम इसे 75 फीसदी तक पहुंचाना चाहते हैं। हम बंगलूरू, वाराणसी, पटना, रांची, जमशेदपुर, बोकारो, भुवनेश्वर, कटक और कोलकाता आदि में अपना कारोबार फैला रहे हैं।
इस विकास में गेल की इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड और महानगर गैस लिमिटेड जैसी कंपनियां बड़ी भागीदारी निभाएंगी। अभी सिर्फ इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड ही करीब दो लाख घरों तक पीएनजी की पहुंच बना चुकी है, जबकि महानगर गैस लिमिटेड की पहुंच करीब डेढ़ लाख घरों तक हो चुकी है। देखा जाए तो आठ लाख कनेक्शन में दिल्ली-मुंबई का योगदान करीब 3.5 लाख का है।