ईडी ने इस साल फरवरी में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा की एफआईआर के आधार पर धनशोधन का मामला दर्ज किया। जांच एजेंसी ने आरोप पत्र में कहा कि समूह के शीर्ष अधिकारी कमीशनखोरी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त थे। यह कंपनी की लागत पर निजी लाभ कमा रहे थे।
इन्होंने समूह के नियमों को तोड़ते हुए साठगांठ के जरिये ऐसी कंपनियों को भारी ऋण दिया जिन पर पहले से कर्ज बकाया था। शिवशंकरन के साथ साजिश कर शिवा समूह की कंपनियों को कथित तौर पर गलत ढंग से कर्ज दिया गया जिसमें 494 करोड़ रुपये अभी भी बकाया हैं।
बैलेंस शीट में भी की गड़बड़ी
ईडी ने आरोपपत्र में कहा है कि निदेशकों ने अपने फायदे के लिए आईएफआईएन के खातों में भी घपला किया। ‘सर्किट्स ट्रांजेक्शन’ के तहत समूह की बैलेंस शीट में कंपनी का प्रदर्शन बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया। वर्ष 2015-16 से 2017-18 के दौरान आईएफआईएन का प्रदर्शन नकारात्मक रहा लेकिन अधिकारियों के लिए कंपनी के बेहतर कार्य प्रदर्शन आधारित भुगतान और कमीशन में भारी वृद्धि की गई।
रियायती दर पर दिए समूह के शेयर
ईडी के मुताबिक आईएलएफएस लिमिटेड के शेयरों को रियायती दर पर कर्मचारी कल्याण ट्रस्ट को हस्तांतरित किया गया। जिन्हें बाद में भारी प्रीमियम पर समूह के बाहर विभिन्न संस्थाओं को बेचा गया। इससे मिली रकम कर्मचारियों को नकद बांटी गई, जिसका बड़ा हिस्सा शीर्ष प्रबंधन को मिला।
एक कंपनी की सचिव ने दिया इस्तीफा
इस बीच, आईएलएंडएफएस समूह ने शनिवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज को बताया कि उसकी इंजीनियरिंग व निर्माण कंपनी की सचिव और अनुपालन अधिकारी सहेली बनर्जी ने शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया। हालांकि समूह ने इस्तीफे का कारण स्पष्ट नहीं किया है।
पोंजी स्कीम घोटाले के मामले में ईडी ने हरियाणा में एक फर्म की 261 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की है। हरियाणा की मल्टी लेवल मार्केटिंग कंपनी के खिलाफ धनशोधन रोधी कानून के तहत यह कार्रवाई की गई है। ईडी ने हिसार के फ्यूचर मेकर लाइफ केयर प्राइवेट लिमिटेड और इसके दो निदेशक राधेश्याम और बंशी लाल के रिहायशी ठिकानों, कृषि भूमि और घरों को अटैच करने का आदेश दिया।
इसके तहत हिसार, आदमपुर, कुलम, दिल्ली और चंडीगढ़ में 16 अचल संपत्तियों और 34 खातों में जमा लगभग 252 करोड़ रुपये की रकम अटैच की गई। तेलंगाना पुलिस द्वारा दर्ज धोखाधड़ी की शिकायतों के बाद इस साल मार्च में ईडी ने समूह के खिलाफ केस दर्ज किया था। कंपनी पर आरोप है कि वह लोगों को हर महीने 20 हजार से दस लाख रुपये तक कमाने का झांसा देकर चपत लगाती थी।