वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (फाइल फोटो)
- फोटो : पीटीआई
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि बैंक आपातकालीन ऋण सुविधा के तहत एमएसएमई को कर्ज देने से इनकार नहीं कर सकते हैं। अगर कोई बैंक इससे इनकार करता है तो इसकी आगे जानकारी दी जानी चाहिए। सौ फीसदी गारंटीशुदा आपातकालीन ऋण सुविधा योजना के तहत 23 जुलाई 2020 तक सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक कुल 1,30,491.79 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत कर चुके हैं। इसमें से 82,065.01 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं।
सीतारमण ने उद्योग संगठन फिक्की ( FICCI ) के एक कार्यक्रम में कहा, 'बैंक आपातकालीन ऋण सुविधा के तहत कवर किए गए एमएसएमई को कर्ज देने से मना नहीं कर सकते। यदि इससे इनकार किया गया है, तो ऐसे उदाहरणों की सूचना दी जानी चाहिए। मैं इस पर गौर करूंगी।' उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रालय भारतीय रिजर्व बैंक के साथ आतिथ्य क्षेत्र के लिए ऋण की किश्त अदायगी पर रोक (मोरोटोरियम) या ऋण पुनर्गठन योजना पर काम कर रहा है।
आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत केंद्र ने सूक्ष्म, छोटे और मझोले कारोबारियों के लिए तीन लाख करोड़ रुपये के गिरवी मुक्त ऋण सुविधा की घोषणा की थी। उन्होंने कहा, मैं आतिथ्य क्षेत्र के लिए मोरोटोरियम या पुनर्गठन के विस्तार की जरूरत को समझती हूं। हम इस बारे में आरबीआई के साथ काम कर रहे हैं। मौजूदा स्थिति से निपटने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। ऐसा हितधारकों और उद्योग विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श के बाद किया जा रहा है।
फिक्की (भारतीय वाणिज्य और उद्योग महासंघ) ने वित्त मंत्री सीतारमण के हवाले से ट्वीट किया, ‘पुनर्गठन पर ध्यान दिया जा रहा है। वित्त मंत्रालय आरबीआई (भारतीय रिजर्व बैंक) के साथ सक्रिय रूप से काम कर रहा है। सिद्धांत के रूप में पुनर्गठन की जरूरत को पूरी तरह स्वीकार किया गया है।’