देश के आर्थिक मोर्चे पर एक शानदार खबर। अमेरिकी वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भारत की रेटिंग को 13 साल बाद एक पायदान सुधारा है और इसके भविष्य परिदृश्य को स्थिर बताते हुए ‘बीएए-2’ कर दिया है। शुक्रवार को जारी अपनी रिपोर्ट में मूडीज ने जीएसटी और नोटबंदी जैसे कदमों को अर्थव्यवस्था के मुफीद बताया है।
रेटिंग में इस सुधार से दुनिया भर में भारत की आर्थिक छवि बढ़ गई है जिससे इसे न सिर्फ कर्ज मिलने में आसानी होगी बल्कि कर्ज पर ब्याज भी कम देना होगा। इससे देश के आधारभूत संरचना के विकास में तेजी लाने में मदद मिलेगी जिससे रोजगार के भी अवसर खुलेंगे।
उल्लेखनीय है कि कारोबार में सहूलियत को लेकर विश्व बैंक द्वारा जारी हालिया रिपोर्ट में भारत की स्थिति में 30 पायदान का उछाल पाया गया। इससे पहले वर्ष 2004 में संस्था ने भारत की क्रेडिट रैंकिंग में सुधार करते हुए उसे ‘बीएए-3’ किया था। यही नहीं संस्था ने 2015 में भारत की क्रेडिट रैंकिंग के आउटलुक यानी भविष्य परिदृश्य को ‘स्थिर’ से बढ़ाते हुए ‘सकारात्मक’ (पॉजिटिव) कर दिया था। बताते चलें कि अंतरराष्ट्रीय एजेंसी ने बेहतर विकास की संभावनाओं का हवाला देते हुए भारत को यह स्थान दिया है।
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‘बीएए-3’ निवेश श्रेणी की न्यूनतम रैंकिंग थी जो ‘जंक’ दर्जे से थोड़ा सा ऊपर है। मूडीज ने कहा कि संस्था ने रेटिंग्स अपग्रेड करने का फैसला इस उम्मीद से लिया है कि आर्थिक और सांस्थानिक सुधारों की दिशा में लगातार आगे बढ़ने से भविष्य में भारत की उच्च वृद्धि की संभावनाएं बढ़ेंगी। यही नहीं, सरकारी कर्ज के लिए भी इसका बड़ा और स्थिर वित्तीय आधार तैयार होगा। इससे मध्यम अवधि में सामान्य सरकारी कर्ज का बोझ धीरे-धीरे कम होने लगेगा।
एजेंसी ने कहा है कि जीएसटी जैसे सुधार राज्यों के बीच व्यापार की बाधा को हटाते हुए उत्पादकता को बढ़ाएंगे। मौद्रिक नीति के ढांचे में सुधार, बैंकों के अटके लोन की समस्या से निपटने के लिए उठाए गए कदम और नोटबंदी जैसी कवायदें अर्थव्यवस्था की खामियों को ठीक करने की मंशा से उठाई गई हैं। इन सुधारात्मक उपायों में बायोमीट्रिक व्यवस्था के लिए आधार का विस्तार और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के जरिए सब्सिडी सही व्यक्ति तक पहुंचाने जैसे कदम भी शामिल हैं।
क्रेडिट प्रोफाइल को लेकर किया आगाह
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एजेंसी ने आगाह किया है कि कर्ज का बड़ा बोझ अब भी देश की क्रेडिट प्रोफाइल के लिए बड़ी रुकावट है। बयान में कहा गया है कि संस्था मानती है कि सुधारों की वजह से कर्ज में तेज बढ़ोतरी का जोखिम भी होगा। सुधारों से स्थायी विकास की संभावनाओं को बढ़ावा मिलेगा इस बात का उल्लेख करते हुए एजेंसी ने कहा कि सरकार आर्थिक और संस्थागत सुधारों के व्यापक कार्यक्रम को लेकर अभी बीच रास्ते में है।
सुधारात्मक कदमों का सकारात्मक असर दिखने में लगेगा वक्त
एजेंसी ने कहा है कि भूमि और श्रम बाजार में योजनागत सुधार जैसे दूसरे महत्वपूर्ण प्रयासों के परिणाम मिलने बाकी हैं जो राज्यों के बीच आपसी सहयोग पर काफी अधिक निर्भर करते हैं। हालांकि एजेंसी ने यह भी कहा है कि जीएसटी और नोटबंदी जैसे कुछ कदमों ने फौरी तौर पर विकास पर दबाव डाला है। हालांकि इनमें से अधिकांश सुधारात्मक कदमों का सकारात्मक असर दिखने में अभी वक्त लगेगा।
अगले वित्त वर्ष से बढ़ेगी विकास दर
मूडीज ने अनुमान व्यक्त किया है कि मार्च 2018 में खत्म होने वाले मौजूदा वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी 6.7 फीसदी रह सकती है। हालांकि, तात्कालिक बाधाएं खत्म होने और जीएसटी में राहत बढ़ाने से अगले वित्त वर्ष में वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 7.5 फीसदी तक पहुंचेगी। इसी तरह से वित्त वर्ष 2019 से भी जीडीपी दर बढ़ती रहेगी। मूडीज ने यह भी कहा है कि लंबी अवधि में भारत की विकास क्षमता ‘बीएए’ रेटिंग वाले अधिकांश देशों की तुलना में काफी अधिक है।
देश में आया वित्तीय अनुशासन
जेटली ने आगे कहा कि देश में एक वित्तीय अनुशासन आया है। पहले यह नहीं था, लेकिन अब लोग भी धीरे-धीरे इसको समझ रहे हैं। इस तरह के सुधार आगे भी जारी रहेंगे, जिससे इकोनॉमी को एक नई दिशा और दशा आने वाले सालों में देखने को मिलेगी। बहुत से लोगों को आशंका थी कि क्या सरकार के इन कार्यो से कुछ फायदा मिलेगा। अब उनको जवाब भी मिल गया है और उन्हें अपने अंदर झांक कर देखना चाहिए।