विनिर्माण क्षेत्र के कमजोर प्रदर्शन के कारण औद्योगिक उत्पादन में दिसंबर 2019 में 0.3 फीसदी की कमी आई। जनवरी महीने में तेल आयात 15.27 फीसदी बढ़कर 12.97 अरब डॉलर जबकि गैर-तेल आयात 6.72 फीसदी घटकर 28.17 अरब डॉलर रहा।
आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-जनवरी के दौरान निर्यात एक साल पहले की इसी अवधि की तुलना में 1.93 फीसदी गिरकर 265.26 अरब डॉलर रहा। इस दौरान आयात में 8.12 फीसदी गिरावट रही और यह 398.53 अरब डॉलर रहा।
इस 10 माह की अवधि में व्यापार घाटा कम होकर 133.27 अरब डॉलर रहा जो एक साल पहले इसी अवधि में 163.27 अरब डॉलर रहा। इस बीच, रिजर्व बैंक की विज्ञप्ति के अनुसार दिसंबर 2019 में सेवा निर्यात करीब 20 अरब डॉलर रहा जबकि आयात 12.56 अरब डॉलर था।
निर्यात आंकड़े के बारे में कपड़ा निर्यात संवर्धन परिषद (एईपीसी) के चेयरमैन ए शक्तिवेल ने कहा कि कपड़ा क्षेत्र को निर्यात बढ़ाने के लिए सरकार से तत्काल मदद की जरूरत है। उन्होंने कहा, कपड़ा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए राज्य एवं केंद्रीय करों एवं शुल्कों में छूट योजना (आरओएससीटीएल) तथा भारत से वस्तु निर्यात योजना के सही तरीके से क्रियान्वयन जरूरी है।
निर्यातकों के संगठनों का शीर्ष निकाय फियो के अध्यक्ष शरद कुमार सर्राफ ने कहा कि वैश्विक और घरेलू कारकों की वजह से फिर से मासिक निर्यात घटा है। उन्होंने कहा, इसके अलावा संरक्षणवाद और नकदी चिंता के साथ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में कोरोना वायरस के फैसले से वैश्विक धारणा और कमजोर हुई है। इसके कारण निर्यातक निर्यात में देरी कर रहे हैं।